हरियाणा बिजली हड़ताल खत्म: CM सैनी-अनिल विज से वार्ता के बाद कर्मचारियों ने वापस लिया आंदोलन, “किसी तरह का निजीकरण नहीं होगा”
पंचकूला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ हुई वार्ता के बाद हरियाणा के बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल समाप्त हो गई है। 23 अक्टूबर की शाम को कर्मचारी यूनियनों ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा की, जिससे गुरुग्राम-फरीदाबाद समेत कई इलाकों में जारी बिजली-पानी के संकट से राहत मिलने की उम्मीद है।
वार्ता के बाद मुख्यमंत्री सैनी ने स्पष्ट कहा कि राज्य में बिजली क्षेत्र का किसी भी तरह का निजीकरण नहीं होगा और सरकार कर्मचारियों के साथ खड़ी है। कर्मचारी यूनियनों के मुताबिक सरकार ने उनकी चारों प्रमुख मांगें मान ली हैं। अगली बैठक 3 नवंबर को बकाया मुद्दों पर होगी।
यह हड़ताल हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के 19 अक्टूबर के उस आदेश के विरोध में थी, जिसमें Eleven Power Pvt Ltd को गुरुग्राम और नूंह में पैरेलल बिजली वितरण का लाइसेंस दिया गया था। कर्मचारियों को आशंका थी कि यह निजीकरण की ओर पहला कदम है। वार्ता में सरकार ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत HERC को इस आदेश की समीक्षा करने का निर्देश देने पर सहमति जताई।
हड़ताल के दौरान गुरुग्राम, फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों में करीब 30 घंटे तक बिजली गुल रही, जिससे पानी की आपूर्ति भी बाधित हुई। इससे पहले मुख्यमंत्री सैनी ने कर्मचारियों से हड़ताल टालने की अपील की थी और सरकार ने HERC के फैसले को APTEL में चुनौती देने का ऐलान किया था।
वार्ता के बाद जॉइंट एक्शन कमेटी ने बिजली आपूर्ति तत्काल बहाल करने की घोषणा की है। सैनी सरकार के इस फैसले को कर्मचारी-हितैषी कदम माना जा रहा है — सरकार ने न तो कर्मचारियों से टकराव का रास्ता चुना और न ही निजीकरण की आशंकाओं को बढ़ने दिया। तीन दिन चले संकट का बातचीत से समाधान निकलना राज्य सरकार की सुलझी हुई कार्यशैली का उदाहरण है।
