हरियाणा के वरुण भांभू ने भाला फेंक में रचा इतिहास: 13 साल की उम्र में 71.20 मीटर थ्रो, तोड़ा राष्ट्रीय रिकॉर्ड
हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव बनगांव के 13 वर्षीय खिलाड़ी वरुण भांभू ने भाला फेंक में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित 41वीं नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में वरुण ने अंडर-14 आयु वर्ग की भाला फेंक स्पर्धा में 71.20 मीटर की थ्रो फेंकी। इसी प्रदर्शन के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया और पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड काफी बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया। इससे पहले अंडर-14 वर्ग में राष्ट्रीय रिकॉर्ड 60.65 मीटर का था, जो भुवनेश्वर में भिक्य बरमन के नाम दर्ज था। वरुण ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 71.20 मीटर दूर भाला फेंककर इस रिकॉर्ड को 10 मीटर से अधिक के अंतर से तोड़ दिया। प्रतियोगिता में उनके छह प्रयासों के दौरान लगातार अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला और सर्वश्रेष्ठ थ्रो ने उन्हें रिकॉर्ड बुक में जगह दिला दी। इसी मुकाबले में उत्तर प्रदेश के विनय ने 62.17 मीटर की थ्रो के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि बिहार के राहुल ने 58.55 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। दिलचस्प बात यह है कि विनय की थ्रो भी पुराने रिकॉर्ड से बेहतर रही। वरुण की इस सफलता के पीछे उनके पिता और कोच हनुमान भांभू की मेहनत भी अहम मानी जा रही है। हनुमान खुद पूर्व भाला फेंक खिलाड़ी रहे हैं और अब बनगांव में युवा एथलीटों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनकी अकादमी से जुड़े खिलाड़ियों के नाम अंडर-14, अंडर-16, अंडर-18, अंडर-20 और अंडर-23 वर्गों में राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज बताए जाते हैं। वरुण को प्रतिभा विरासत में मिली है, लेकिन 13 साल की उम्र में इतनी बड़ी थ्रो उनकी कड़ी मेहनत और अनुशासन का भी प्रमाण है। हरियाणा की धरती से नीरज चोपड़ा जैसे ओलंपिक स्वर्ण विजेता भाला फेंक खिलाड़ी निकले हैं और अब वरुण जैसे युवा खिलाड़ी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। भाला फेंक में हरियाणा का माहौल, गांवों में कोचिंग की संस्कृति और युवाओं का जुनून इस खेल को लगातार नई ऊंचाई दे रहा है। वरुण की उपलब्धि से बनगांव ही नहीं, पूरे फतेहाबाद जिले और प्रदेश के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है। इस रिकॉर्ड के बाद वरुण से भविष्य में और बड़े प्रदर्शनों की उम्मीद की जा रही है। जूनियर स्तर पर इस तरह का प्रदर्शन खिलाड़ी के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देता है और आगे की बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए मजबूत आधार तैयार करता है। हरियाणा सरकार और खेल संघों की ओर से युवा प्रतिभाओं को मिलने वाला प्रोत्साहन भी ऐसे प्रदर्शनों में अहम भूमिका निभाता है। वरुण की कहानी प्रदेश के हर उस बच्चे के लिए प्रेरणा है जो गांव के मैदान से बड़े मंच तक पहुंचने का सपना देखता है।
