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हरियाणा सरकार का भ्रष्टाचार पर सख्त प्रहार: ट्रैप केस में पकड़े कर्मचारियों को जमानत के बाद भी पुरानी पोस्टिंग नहीं

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  • खबर: हरियाणा सरकार का भ्रष्टाचार पर सख्त प्रहार: ट्रैप केस में पकड़े कर्मचारियों को जमानत के बाद भी पुरानी पोस्टिंग नहीं
  • तारीख़: 4 नवम्बर 2026, 7:16 पूर्वाह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: हरियाणा
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए तबादलों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला लागू किया है। अब राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के ट्रैप या छापेमारी के मामलों में रंगे हाथों पकड़े गए सरकारी अधिकारी और कर्मचारी जमानत पर रिहा होने के बाद भी अपने पुराने पद और पुराने स्टेशन पर काम नहीं कर सकेंगे। सरकार ने साफ कर दिया है कि ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को मामले की जांच और मुकदमे की सुनवाई से जुड़े क्षेत्राधिकार से दूर स्थानांतरित करना अनिवार्य होगा। यह फैसला प्रदेश में पारदर्शी और निष्पक्ष प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

यह आदेश हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव कार्यालय के सतर्कता विभाग की ओर से 27 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया है। पत्र क्रमांक 09/49/2025-6VI के माध्यम से यह निर्देश प्रदेश के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, पुलिस महानिदेशक, छह मंडलों के मंडलायुक्तों, सभी उपायुक्तों, बोर्डों एवं निगमों के प्रबंध निदेशकों, मुख्य प्रशासकों और राज्य विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों तक भेजा गया है। इस आदेश का आधार राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का 9 जून 2026 का संदर्भ पत्र है, जिसमें इस तरह की व्यवस्था की जरूरत बताई गई थी। सभी विभागों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

आदेश के पीछे सरकार का तर्क स्पष्ट है। सरकार का मानना है कि यदि ट्रैप केस में पकड़ा गया कर्मचारी जमानत पर आने के बाद भी उसी स्थान पर तैनात रहता है, जहां उसके खिलाफ मुकदमा चल रहा है, तो वह अपने पद, प्रभाव और स्थानीय संपर्कों का इस्तेमाल करके शिकायतकर्ता और अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित कर सकता है। शिकायतकर्ता पर दबाव बनाने, उसे डराने या गवाहों से छेड़छाड़ की आशंका को रोकने के लिए ही तबादले की यह व्यवस्था बनाई गई है। नए नियम के तहत तबादले का स्थान ऐसा होना चाहिए, जहां से आरोपी कर्मचारी के लिए शिकायतकर्ता या गवाहों से संपर्क कर उन्हें प्रभावित करना आसान न हो। प्राथमिकता यह रहेगी कि तबादला आसपास के जिलों की सीमा से भी आगे किया जाए।

जिला कैडर के कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था भी स्पष्ट की गई है। आमतौर पर जिला कैडर के कर्मचारियों का तबादला संबंधित जिले से बाहर नहीं किया जा सकता, इसलिए सरकार ने निर्देश दिया है कि यदि ट्रैप या छापेमारी के मामले में पकड़ा गया अधिकारी या कर्मचारी जिला कैडर से संबंधित है, तो उसे उसी जिले के भीतर किसी अन्य दूरस्थ स्टेशन पर तैनात किया जाए। यह नियम केवल वर्तमान में जमानत पर चल रहे अधिकारियों और कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। जो अधिकारी या कर्मचारी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं, जमानत मिलने के बाद उनकी तैनाती भी इसी व्यवस्था के तहत की जाएगी, यानी उन्हें भी पुराने पद और पुराने स्टेशन पर वापस नहीं भेजा जा सकेगा।

सतर्कता विभाग ने आदेशों के पालन को लेकर सख्त चेतावनी भी दी है। निर्देशों में कहा गया है कि पालन में किसी भी तरह की ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन निर्देशों का जारी होना किसी आरोपी को दोषी घोषित करना नहीं है, मामले का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा। सरकार का यह कदम भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति और निष्पक्ष जांच प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस पहल के रूप में देखा जा रहा है।


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