हरियाणा सरकार ने शहरी क्षेत्रों में मकान बनाने के नियमों में बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है। हरियाणा भवन संहिता, 2017 में संशोधन करके 1,000 वर्ग मीटर तक के आवासीय प्लॉट पर अधिक फ्लोर एरिया रेशियो यानी एफएआर की अनुमति दी जाएगी। छोटे और मध्यम प्लॉट पर अब 264 प्रतिशत तक निर्माण किया जा सकेगा, जबकि भवन की अधिकतम ऊंचाई 16.5 मीटर ही रहेगी। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के निदेशक डॉ. जे. गणेशन ने हितधारकों से 1 दिसंबर तक आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। यह अभी प्रस्ताव की अवस्था में है, अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
प्रस्ताव में प्लॉट के आकार के अनुसार अलग सीमा तय की गई है। 100 वर्ग मीटर तक के प्लॉट पर आधार एफएआर 165 प्रतिशत, अधिकतम एफएआर 264 प्रतिशत और ग्राउंड कवरेज 75 प्रतिशत होगा। 100 से अधिक और 250 वर्ग मीटर तक के प्लॉट पर आधार एफएआर 145 प्रतिशत, अधिकतम एफएआर 264 प्रतिशत और ग्राउंड कवरेज 75 प्रतिशत प्रस्तावित है। 250 से अधिक और 350 वर्ग मीटर तक के प्लॉट पर आधार एफएआर 130 प्रतिशत, अधिकतम एफएआर 240 प्रतिशत और ग्राउंड कवरेज 66 प्रतिशत होगा। 350 से अधिक और 500 वर्ग मीटर तक के प्लॉट पर आधार एफएआर 120 प्रतिशत और अधिकतम एफएआर 240 प्रतिशत मिलेगा। 500 से अधिक और 1,000 वर्ग मीटर तक के प्लॉट पर आधार एफएआर 100 प्रतिशत और अधिकतम एफएआर 240 प्रतिशत तय किया गया है।
पांचों श्रेणियों में एक स्तर का बेसमेंट बनाने की अनुमति दी गई है। ऊंचाई की 16.5 मीटर सीमा में भूतल सहित तीन मंजिल और स्टिल्ट सहित चार मंजिल तक का ढांचा शामिल है, जिससे परिवार अपनी जरूरत के अनुसार मंजिलों का नियोजन कर सकेंगे। आधार एफएआर से अधिक निर्माण के लिए निर्धारित शुल्क देकर अतिरिक्त एफएआर खरीदा जा सकेगा, लेकिन इसके लिए वैधानिक स्वीकृतियां और नियमों का पालन अनिवार्य होगा। यानी अधिक निर्माण का अधिकार मिलने के साथ सुरक्षा, स्वीकृति और शुल्क की शर्तें भी लागू रहेंगी।
एफएआर को सरल भाषा में समझें तो यह प्लॉट के क्षेत्रफल की तुलना में सभी मंजिलों पर बने कुल निर्मित क्षेत्र का अनुपात है। उदाहरण के लिए, यदि प्लॉट 100 वर्ग मीटर का है और एफएआर 200 प्रतिशत है, तो सभी मंजिलों को मिलाकर कुल 200 वर्ग मीटर तक निर्माण किया जा सकता है। ग्राउंड कवरेज यह बताता है कि जमीन के कितने हिस्से पर भवन की निचली मंजिल बन सकती है, जबकि बाकी हिस्सा खुला, हरियाली, पार्किंग और आवाजाही के लिए छोड़ा जाता है। इसलिए एफएआर बढ़ने से एक ही प्लॉट पर अधिक कमरे या बड़ा रहने का स्थान बनाना संभव हो सकता है, बशर्ते ऊंचाई और सुरक्षा नियमों का पालन हो।
प्रक्रिया के तहत पहले प्रस्ताव पर लोगों की राय ली जा रही है। प्लॉट मालिक, निवासी संघ, वास्तुकार, बिल्डर और अन्य पक्ष 1 दिसंबर तक ईमेल से अपनी आपत्ति या सुझाव भेज सकते हैं। इसके बाद विभाग इन सुझावों पर विचार करेगा और फिर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पृष्ठभूमि में देखें तो भवन संहिता, 2017 शहरी हरियाणा में निर्माण का मुख्य ढांचा तय करती है, जिसमें ऊंचाई, कवरेज और सुरक्षा मानक शामिल हैं। शहरों में आबादी बढ़ने और जमीन महंगी होने के कारण एक ही प्लॉट पर अधिक और व्यवस्थित निर्माण की मांग लंबे समय से उठ रही है, और इस प्रस्ताव से छोटे प्लॉट वाले परिवारों को भी अपने घर का विस्तार करने का अधिक अवसर मिल सकता है।
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