हरियाणा सरकार के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने 3 नवंबर 2026 को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एमडी और एमएस पाठ्यक्रमों में दाखिले की प्रक्रिया अधिसूचित कर दी है। यह व्यवस्था सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी चिकित्सा महाविद्यालयों के साथ निजी विश्वविद्यालयों में भी लागू होगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई अधिसूचना पहले जारी की गई संबंधित अधिसूचनाओं का स्थान लेगी। इसलिए इस सत्र के अभ्यर्थियों को दाखिले के लिए अब नए नियमों को ही आधार मानना होगा।
सरकारी चिकित्सा संस्थानों में सीटों के बंटवारे का ढांचा साफ रखा गया है। वहां 50 प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय मेरिट से और 50 प्रतिशत सीटें हरियाणा राज्य मेरिट से भरी जाएंगी। राज्य कोटे की एमडी और एमएस सीटों में से 40 प्रतिशत तक सीटें पात्र सेवारत डॉक्टरों के लिए आरक्षित रहेंगी। इसके साथ ही 25 प्रतिशत संस्थागत वरीयता उन अभ्यर्थियों को मिलेगी, जिन्होंने हरियाणा के संस्थानों से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है। निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में 50 प्रतिशत सीटें ओपन मेरिट या राज्य कोटे से और शेष 50 प्रतिशत सीटें प्रबंधन श्रेणी से भरी जाएंगी।
शुल्क और सुरक्षा राशि के नियम भी अधिसूचना में विस्तार से बताए गए हैं। पंजीकरण शुल्क वापस नहीं होगा। अनारक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए यह 2,500 रुपये और हरियाणा के दिव्यांग, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 1,250 रुपये रखा गया है। दूसरे दौर में सुरक्षा राशि सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में केवल राज्य कोटे के लिए 25,000 रुपये होगी, जिसमें अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों के लिए यह 12,500 रुपये है। सरकारी और निजी दोनों तरह के संस्थानों में राज्य कोटे के लिए यह राशि 2 लाख रुपये होगी, जबकि निजी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में स्ट्रे वैकेंसी दौर के लिए 5 लाख रुपये की सुरक्षा राशि तय की गई है।
काउंसलिंग की जिम्मेदारी पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक को सौंपी गई है। यह संयुक्त केंद्रीकृत ऑनलाइन काउंसलिंग नीट-पीजी 2026 की मेरिट के आधार पर होगी। विस्तृत कार्यक्रम, पोर्टल और सीट मैट्रिक्स अलग से प्रकाशित किया जाएगा, इसलिए अभ्यर्थियों को नियमित रूप से uhsr.ac.in और dmer.haryana.gov.in पर जानकारी देखते रहना चाहिए। किसी भी अभ्यर्थी का आवंटन तब तक अनंतिम रहेगा, जब तक भौतिक दस्तावेज सत्यापन पूरा नहीं हो जाता।
आयुर्वेद के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए भी व्यवस्था बताई गई है। वहां दाखिला एआईएपीजीईटी-2026 की मेरिट के आधार पर होगा। आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों के लिए 10 प्रतिशत सीटें रखी गई हैं, जबकि 85 प्रतिशत सीटों की काउंसलिंग श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र द्वारा की जाएगी। इससे आयुर्वेद के अभ्यर्थियों को भी अपने विकल्पों की स्पष्ट तस्वीर मिलती है।
अभ्यर्थियों के लिए इसका सीधा अर्थ यह है कि वे पहले अपनी श्रेणी, सेवा संबंधी पात्रता, एमबीबीएस संस्थान और शुल्क की स्थिति को ठीक से जांच लें। दूसरे दौर और स्ट्रे वैकेंसी दौर में भाग लेने से पहले सुरक्षा राशि की व्यवस्था भी पहले से कर लेना समझदारी होगी। दैनिक जागरण के अनुसार, निर्धारित अंतिम तिथि के आसपास या उसके बाद एमडी या एमएस पाठ्यक्रम छोड़ने पर 10 लाख रुपये के बॉन्ड और राज्य के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों से तीन वर्ष तक प्रतिबंध का प्रावधान भी है। इसलिए विकल्प भरते समय विशेषज्ञता, संस्थान और फीस का चुनाव सोच-समझकर करना जरूरी है। निजी विश्वविद्यालयों में कुछ विशेषज्ञताओं की वार्षिक ट्यूशन फीस 45 लाख रुपये तक तय की गई है, यह जानकारी भी बजट की योजना बनाने में मदद करेगी।

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