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सरकारी योजनाएँ

हरियाणा गौशाला अनुदान 2026: 629 गौशालाओं को ₹86.95 करोड़ की सहायता, चारे और शेड निर्माण पर खर्च होगी राशि

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: हरियाणा गौशाला अनुदान 2026: 629 गौशालाओं को ₹86.95 करोड़ की सहायता, चारे और शेड निर्माण पर खर्च होगी राशि
  • तारीख़: 5 नवम्बर 2026, 5:45 पूर्वाह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: सरकारी योजनाएँ
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

हरियाणा सरकार ने प्रदेश की 629 गौशालाओं को 86 करोड़ 95 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की है। यह राशि गौशालाओं में चारे की व्यवस्था, शेड निर्माण, रखरखाव और अन्य आवश्यक कार्यों पर खर्च होगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को चंडीगढ़ में कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी साझा की। सरकार का कहना है कि गौवंश के संरक्षण और गौशालाओं के विकास के लिए यह सहायता एक अहम कदम है।

प्रदेश सरकार गौशालाओं के संरक्षण और विकास के लिए लगातार कदम उठा रही है। गौशालाओं को चारे और शेड निर्माण के लिए अनुदान दिया जाता है, और इसी कड़ी में 629 गौशालाओं को यह राशि प्रदान की गई है। गौशालाओं के संचालन में सबसे बड़ा खर्च चारे का होता है, क्योंकि वहाँ बड़ी संख्या में गोवंश की देखभाल की जाती है। इसके साथ ही शेड निर्माण और रखरखाव भी जरूरी है, ताकि पशुओं को मौसम की मार से सुरक्षित रखा जा सके। यही वजह है कि इस सहायता राशि का उपयोग इन्हीं कार्यों पर किया जाएगा।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि युवाओं की सुरक्षा, गौवंश संरक्षण और प्रदेश का समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता है। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है। प्रदेश में गौशालाएँ निराश्रित और आवारा गोवंश को आश्रय देती हैं, इसलिए उनके सुचारु संचालन के लिए नियमित आर्थिक सहायता जरूरी मानी जाती है। चारे की पर्याप्त व्यवस्था से गौशालाओं पर आर्थिक बोझ कम होगा और वे पशुओं की बेहतर देखभाल कर सकेंगी।

हरियाणा में पशुपालन एवं डेयरी विभाग और हरियाणा गौ सेवा आयोग के माध्यम से गौशालाओं को चारा खरीदने के लिए अनुदान के रूप में वित्तीय सहायता दी जाती है। पंजीकृत गौशालाएँ इस व्यवस्था के तहत सहायता प्राप्त करती हैं। नई सहायता राशि से गौशाला प्रबंधकों को अपने यहाँ रखे गए गोवंश के लिए चारे का इंतजाम करने और शेड से जुड़े अधूरे काम पूरे करने में मदद मिलेगी। ग्रामीण इलाकों में गौशालाएँ स्थानीय लोगों के सहयोग से भी चलती हैं, और सरकारी सहायता उनके काम को और मजबूत करती है।

गौशाला संचालकों के लिए यह जानकारी अहम है कि सहायता राशि का उपयोग चारे, शेड निर्माण और रखरखाव जैसे तय कार्यों पर किया जाना है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि गौवंश संरक्षण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में आगे भी कदम उठाए जाते रहेंगे। गौशालाओं को मिली इस सहायता से प्रदेश में गोवंश की देखभाल व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।


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