प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भूटान की ओर से एक ऐतिहासिक और भावुक सम्मान मिला है। भूटान के नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में बनाए गए 108 बौद्ध स्तूपों में से 76वां स्तूप प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित किया है। इस स्तूप को जांगचुब चोर्टेन कहा जाता है। भूटान नरेश और भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस स्तूप को मोदी के नाम समर्पित करने वाली पट्टिका का अनावरण किया। प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को फेसबुक पर एक संदेश के जरिए भूटान के राजा और वहां की जनता का गहरा आभार व्यक्त किया और कहा कि वे इस सम्मान को भारत की जनता की ओर से स्वीकार करते हैं।
यह सम्मान एक असाधारण उपलब्धि के बीच दिया गया है। भूटान ने एक नवंबर 2026 को गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में मात्र छह घंटे के भीतर 108 बौद्ध स्तूपों का निर्माण पूरा करके एक ऐतिहासिक कीर्तिमान बनाया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस काम में 40 हजार से अधिक स्वयंसेवकों, भिक्षुओं और कारीगरों ने भाग लिया और काम आधी रात के बाद शुरू हुआ था। ये स्तूप बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण पर्व ल्हाबाब दुचेन के अवसर पर आयोजित पवित्र समारोह के दौरान स्थापित और प्रतिष्ठित किए गए। गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी भूटान की एक महत्वाकांक्षी नियोजित शहर परियोजना है, जिसे भूटानी राजशाही के दृष्टिकोण के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भूटान के राजा और लोगों की इस विशेष गर्मजोशी और उदारता से वे गहरे रूप से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि जांगचुब चोर्टेन भारत और भूटान के बीच साझा आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत तथा दोनों देशों के लोगों के बीच विशेष मित्रता के बंधन का स्थायी प्रतीक बना रहेगा। मोदी का यह संदेश भारत और भूटान के बीच दशकों पुराने भरोसे और निकटता को दर्शाता है। भूटान ने इस समर्पण के जरिए यह संदेश दिया है कि वह भारत के सहयोग और प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता को कितना महत्व देता है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भूटान में मौजूद रहे और उन्होंने इस सम्मान को देश के लिए बड़ा गौरव बताया। रिजिजू ने गेलेफू में आयोजित पवित्र समारोह में भाग लिया, जहां 108 स्तूपों की स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा की गई। भूटान नरेश ने अपने संदेश में कहा कि गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी को लेकर भूटानी राजशाही के दृष्टिकोण को साकार करने में भारत के समर्थन और प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए यह स्तूप उन्हें समर्पित किया गया है। इस तरह यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि दो पड़ोसी देशों के बीच साझेदारी का सम्मान है।
कुल मिलाकर, 76वें स्तूप का प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित किया जाना भारत-भूटान मित्रता के इतिहास में एक यादगार अध्याय बन गया है। एक ही दिन में 108 स्तूपों का निर्माण अपने आप में एक अद्भुत सामूहिक प्रयास था, और उसके बीच भारत के प्रधानमंत्री को मिला यह स्थान दोनों देशों के रिश्तों की गहराई को दिखाता है। भूटान और भारत के बीच आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और मानवीय संबंध सदियों पुराने हैं, और गेलेफू का यह स्तूप आने वाली पीढ़ियों को भी उस मित्रता की याद दिलाता रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी के प्रति भूटान का यह सम्मान भारत के हर नागरिक के लिए गर्व का विषय है।
प्रातिक्रिया दे