DDU-GKY 2.0: 1.83 लाख ग्रामीण युवाओं को नौकरी का लक्ष्य, सरकार ने उद्योगों से मिलाया हाथ
केंद्र सरकार ने ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) के दूसरे चरण में 1.83 लाख ग्रामीण युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने उद्योग जगत से हाथ मिलाया है — कंपनियां युवाओं को अपनी जरूरत के हिसाब से प्रशिक्षित करेंगी और फिर उन्हें नौकरी भी देंगी।
हाल ही में जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में मंत्रालय और राजस्थान स्किल एंड लाइवलीहुड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (RSLDC) की ओर से ‘कैप्टिव एंप्लायर CXO मीट’ आयोजित की गई। इसमें 50 से अधिक नियोक्ता कंपनियों, उद्योग संगठनों, सेक्टर स्किल काउंसिलों और विभिन्न राज्यों के ग्रामीण आजीविका मिशनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मकसद उद्योगों की भागीदारी से युवाओं के लिए टिकाऊ रोजगार के मौके तैयार करना था।
DDU-GKY 2.0 के तहत राष्ट्रीय लक्ष्य का 20 प्रतिशत हिस्सा ‘कैप्टिव एंप्लॉयमेंट’ के लिए आरक्षित किया गया है। इसका मतलब है कि कंपनियां प्रशिक्षित युवाओं को सीधे अपने यहां नौकरी पर रखेंगी। इच्छुक कंपनियों को राज्यों की क्रियान्वयन एजेंसियों की ओर से जारी ‘रुचि अभिव्यक्ति’ (EOI) पर आवेदन करना होगा। उन्हीं कंपनियों को पात्र माना जाएगा जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में अपने संस्थानों में कम से कम 500 लोगों को नौकरी दी हो।
सरकार का जोर विनिर्माण, ऑटोमोबाइल, कपड़ा, आतिथ्य, खुदरा, आईटी, टेलीकॉम और बिजली जैसे क्षेत्रों में रोजगार तैयार करने पर है। युवाओं को मशीन चलाने, उत्पादन, सिलाई, तकनीकी सहायता, ग्राहक सेवा, स्टोर संचालन, बिलिंग और होटल प्रबंधन जैसे कामों की ट्रेनिंग दी जाएगी।
वार्ता में साही एक्सपोर्ट्स (गारमेंट), डाइकिन इंडिया (एयर कंडीशनर), मारुति सुजुकी (ऑटोमोबाइल) और टाटा ट्रेंट (रिटेल) जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल रहीं। मंत्रालय के अनुसार अब तक इस योजना के तहत 18.49 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 12.44 लाख को रोजगार भी मिल चुका है। योजना का लक्ष्य प्रशिक्षित युवाओं में कम से कम 70 प्रतिशत को नौकरी या स्वरोजगार दिलाना है।
कंपनियों को भुगतान चार किस्तों (30:20:20:30) में तय उपलब्धियों के आधार पर किया जाएगा, और अंतिम किस्त तभी मिलेगी जब कंपनी प्रशिक्षित युवाओं को कम से कम छह महीने तक नौकरी पर रखे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रशिक्षण के नाम पर सिर्फ खर्च न लिया जाए, बल्कि युवाओं को वास्तव में रोजगार मिले और वे उसमें टिके भी रहें। हरियाणा के ग्रामीण युवाओं के लिए भी यह योजना कौशल और रोजगार का बड़ा अवसर लेकर आई है।
