पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार 5 नवंबर 2026 को पश्चिम बंगाल निवेश प्रोत्साहन नीति 2026 (West Bengal Investment Promotion Policy 2026) जारी कर दी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने उत्कर्षा इको पार्क में आयोजित कार्यक्रम में इस नीति का अनावरण किया। यह नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप तैयार की गई है। नीति 9 मई से लागू मानी गई है, जिस दिन से राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने कार्यभार संभाला था। राज्य में 2025 के बाद से कोई औद्योगिक नीति नहीं थी और उद्योगपति लंबे समय से इसका इंतजार कर रहे थे।
नीति का जोर विनिर्माण, उन्नत प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा, सेमीकंडक्टर तथा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर है। उद्योगों को स्थिर पूंजी निवेश (Fixed Capital Investment) पर प्रोत्साहन दिया जाएगा — सामान्य इकाइयों को 100 प्रतिशत, थ्रस्ट सेक्टर की इकाइयों को 110 प्रतिशत और प्राथमिकता वाले क्षेत्र में लगने वाली इकाई को 120 प्रतिशत तक सहायता मिलेगी। यह भुगतान 10 वर्षों तक या उत्पादन शुरू होने के बाद किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे नए उद्योग लगाने और पुराने उद्योगों के विस्तार दोनों को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही बंद पड़ी इकाइयों को फिर से शुरू करने पर भी खर्च किया जाएगा।
नीति में महिला कर्मचारियों के लिए खास प्रावधान किए गए हैं। MSME क्षेत्र में महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में 10 वर्षों तक 100 प्रतिशत योगदान सरकार देगी। 200 से अधिक कर्मचारियों वाली सेवा इकाइयों में महिलाओं के EPF में पांच साल तक 75 प्रतिशत और पुरुषों के लिए 50 प्रतिशत योगदान मिलेगा। बड़ी इकाइयों तथा रणनीतिक और मेगा परियोजनाओं में, जहां कम से कम 200 नौकरियां बनें और जो 400 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में आती हों, वहां भी पांच साल तक 50 प्रतिशत EPF योगदान दिया जाएगा।
पिछली सरकार के समय रुके हुए प्रोत्साहनों का बकाया करीब 50,000 करोड़ रुपये है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह बकाया पूरी तरह सम्मान के साथ दिया जाएगा, हालांकि इसकी समय-सारणी तय करने में कुछ समय लगेगा। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि सरकार एस्क्रो व्यवस्था बना रही है और कुछ संसाधनों की रिंग-फेंसिंग की जा रही है, ताकि निवेशकों को भरोसा रहे कि जो वादा किया गया है वह पूरा होगा और पैसा किसी और काम में नहीं जाएगा। नीति बनाने से पहले गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की औद्योगिक नीतियों का चार साल तक अध्ययन किया गया।
उद्योगपतियों की मदद के लिए सरकार का एक ‘बडी प्रतिनिधि’ परियोजना शुरू होने से लेकर जमीन पर उतरने तक साथ रहेगा, चाहे वह नया उद्योग हो या विस्तार। उद्योग हेल्पलाइन पहले ही शुरू हो चुकी है। जमीन की खरीद, लैंड पूलिंग और विकास में भी सरकार मदद करेगी। सरकार का कहना है कि अल्प और मध्यम अवधि के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध है, जबकि दीर्घकाल में भूमि किरायेदारी कानून, खासकर बरगा से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य औद्योगीकरण को लेकर सकारात्मक है, व्यापार और उद्योग के अनुकूल माहौल बनाया जा रहा है और अर्थव्यवस्था में ‘कट मनी’ व ‘सिंडिकेट’ जैसी वसूली पर रोक लगाई जा रही है। प्रवासी मजदूरों को वापस लाने, बेहतर मजदूरी और कौशल प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि उद्योगों को तैयार कार्यबल मिले और रोजगार बढ़े।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:
1. पश्चिम बंगाल निवेश प्रोत्साहन नीति 2026 कब से लागू है? — नीति 5 नवंबर 2026 को जारी हुई और 9 मई 2026 से प्रभावी मानी गई है, जब से राज्य में भाजपा सरकार ने कार्यभार संभाला।
2. उद्योगों को कितना प्रोत्साहन मिलेगा? — स्थिर पूंजी निवेश पर सामान्य इकाई को 100 प्रतिशत, थ्रस्ट सेक्टर को 110 प्रतिशत और प्राथमिकता वाले क्षेत्र की इकाई को 120 प्रतिशत तक सहायता मिलेगी।
3. महिला कर्मचारियों के लिए क्या खास है? — MSME क्षेत्र में महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के EPF में 10 साल तक 100 प्रतिशत योगदान सरकार देगी।
4. पुराने प्रोत्साहनों का बकाया क्या होगा? — करीब 50,000 करोड़ रुपये का बकाया है; सरकार ने कहा है कि इसका सम्मान किया जाएगा, समय-सारणी के साथ, और एस्क्रो व्यवस्था बनाई जा रही है।
अगला कदम: मध्य प्रदेश में MSME इकाइयों के लिए ₹490 करोड़ की मदद — पढ़ें: https://www.viksitharyana.com/madhya-pradesh-mohan-yadav-490-crore-950-msme-startups/

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