दिवाली से पहले सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत: पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध से इनकार, ग्रीन और नेक्स्ट-जेन लड़ी पटाखों को मिली इजाजत
दिवाली से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार की सिफारिश को स्वीकार करते हुए नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंट ग्रीन पटाखों (लड़ी) की बिक्री और उपयोग की इजाजत दे दी है। यह आदेश देशभर के त्योहार मनाने वालों के लिए बड़ी राहत है।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने 30 सितंबर को कहा कि पूर्ण प्रतिबंध से लोगों की भावनाएं आहत होंगी, लेकिन दिन भर अनियंत्रित पटाखे चलाने की अनुमति भी नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे बुजुर्गों, बीमारों और बच्चों सहित हर जीवित प्राणी पर असर पड़ता है। अदालत ने कहा कि भावनाओं और पर्यावरण के बीच संतुलन का रास्ता निकाला जाएगा — पटाखे चलाने का निश्चित समय और किस तरह के पटाखे चलेंगे, यह तय किया जाएगा।
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को CSIR-NEERI की सिफारिश रखी। उन्होंने बताया कि नई पीढ़ी के जॉइंट ग्रीन पटाखों में एक सेकंड में सिर्फ पांच बेईयां (ब्रेड) फूटती हैं, जबकि पारंपरिक लड़ी में एक सेकंड में 25 बेईयां फूटती हैं — यानी ध्वनि और प्रदूषण दोनों में बड़ी कमी है। अदालत इस सिफारिश को स्वीकार करने के पक्ष में दिखी, बशर्ते सुरक्षा मानक लागू हों।
आदेश के अनुसार, इन पटाखों का निर्माण सिर्फ लाइसेंस प्राप्त निर्माता कर सकेंगे, और उन्हें CSIR-NEERI के तय मानकों, ध्वनि सीमा और उत्सर्जन व सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा। बेरियम वाले पटाखों का सवाल अभी खुला है — केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के लिए 15 अक्टूबर तक का समय दिया गया है।
हरियाणा के लिहाज से यह अहम है, क्योंकि राज्य के 22 में से 14 जिले NCR में आते हैं, जहां प्रदूषण का मुद्दा हर दिवाली पर बहस में रहता है। दिल्ली के लिए अदालत ने अलग आदेश देने की बात कही है।
यह फैसला दिखाता है कि केंद्र सरकार ने अदालत में लोगों की त्योहारी भावनाओं का पक्ष रखा और सुप्रीम कोर्ट ने भी संतुलित राहत दी — न तो पूर्ण प्रतिबंध, न ही बेपरवाह छूट, बल्कि हरे पटाखों के साथ सीमित और सुरक्षित दिवाली।
