फरीदाबाद। हरियाणा सरकार ने ग्रेटर फरीदाबाद की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली एक बड़ी सड़क परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 753 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला एलिवेटेड फ्लाईओवर ग्रेटर फरीदाबाद को एनआईटी फरीदाबाद से जोड़ेगा। प्रस्तावित कॉरिडोर सैनिक कॉलोनी मोड़ से शुरू होकर ग्रेटर फरीदाबाद और अमृता अस्पताल तक जाएगा। इस परियोजना का टेंडर 17 दिसंबर को प्रस्तावित है, जिसके बाद निर्माण एजेंसी के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और परियोजना के धरातल पर उतरने का रास्ता साफ होगा।
हरियाणा सरकार में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री स्वतंत्र प्रभार और तिगांव के विधायक राजेश नागर ने इस मंजूरी पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना फरीदाबाद के विकास और बेहतर यातायात व्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी। मंत्री ने बताया कि इस महत्वपूर्ण परियोजना की मांग उन्होंने विधायक रहते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष भी उठाई थी। अब मंजूरी मिलने से ग्रेटर फरीदाबाद के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होने की दिशा में ठोस प्रगति हुई है।
इस एलिवेटेड कॉरिडोर से बड़खल, अनखीर, मस्जिद चौक, प्याली-हार्डवेयर और बाटा चौक जैसे प्रमुख क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है। ग्रेटर फरीदाबाद से एनआईटी क्षेत्र की ओर आने-जाने वाले लोगों को अभी इन चौराहों पर जाम का सामना करना पड़ता है, और एक ऊंचा कॉरिडोर बनने से वाहन बिना रुके आगे बढ़ सकेंगे। इससे न केवल रोजाना आवागमन करने वालों का समय बचेगा, बल्कि अमृता अस्पताल जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए भी रास्ता सुगम होगा। साथ ही, ग्रेटर फरीदाबाद से गुरुग्राम की ओर आवागमन भी पहले से अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद जताई गई है।
परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण के पास है, जिसने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। टेंडर के बाद निर्माण एजेंसी का चयन होगा और फिर आगे की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। निर्माण कार्य शुरू होने की तारीख और परियोजना पूरी होने की समयसीमा अभी सामने नहीं आई है, इसलिए इन बिंदुओं पर आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा। फिर भी, मंजूरी और टेंडर की तारीख तय होना इस बात का संकेत है कि परियोजना अब कागज से आगे बढ़कर जमीन पर उतरने की ओर बढ़ रही है। फरीदाबाद जैसे तेजी से बढ़ते औद्योगिक शहर के लिए यह कॉरिडोर यातायात, व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी — तीनों के लिहाज से एक बड़ी राहत साबित हो सकता है।

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