हरियाणा मौसम और रबी सलाह: अब शुष्क रहेगा मौसम, सरसों-चना बुवाई शुरू करें किसान
हरियाणा में पिछले दो दिनों की बारिश और मौसमी हलचल के बाद अब मौसम साफ होने लगा है। आसमान खुलने के साथ ही सुबह और रात के समय ठंडक बढ़ गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार नारनौल में न्यूनतम तापमान 13.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा और दिन तथा रात के तापमान में और गिरावट आएगी।
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार पिछले दिनों बंगाल की खाड़ी की ओर से नमी वाली हवाएं प्रदेश तक पहुंची थीं, जिनके प्रभाव से 31 अक्टूबर तक मौसम परिवर्तनशील बना रहा। अब नमी घटने और आसमान साफ होने से सुबह-शाम हल्की ठंड महसूस हो रही है। मौसम विभाग ने हरियाणा और पंजाब में अगले कुछ दिनों तक मुख्य रूप से शुष्क मौसम रहने का अनुमान जताया है, हालांकि कुछ इलाकों में बादल छाए रह सकते हैं और हल्की ठंडी हवाएं चलेंगी।
मौसम की इस स्थिति को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को रबी फसलों की बुवाई शुरू करने की सलाह दी है। खेतों में पर्याप्त नमी होने पर सरसों की बुवाई के लिए आरएच 30 और आरएच 0749 जैसी किस्मों का चयन किया जा सकता है। बुवाई से पहले बीजों का उपचार जरूरी बताया गया है — प्रति किलोग्राम बीज में 2 ग्राम कार्बेंडाजिम मिलाकर उपचार करने से फसल की शुरुआती अवस्था में बीजजनित रोगों से बचाव होगा। चने की सी 235 और एचसी 5 किस्मों की बुवाई भी शुरू की जा सकती है, जबकि चारे के लिए जई और बरसीम की बुवाई की सलाह दी गई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने नवंबर महीने के लिए भी अपना अनुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार देशभर में नवंबर की बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है, जो दीर्घकालिक औसत 29.7 मिलीमीटर के 77 प्रतिशत से कम रह सकती है। हालांकि मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से बेहतर बारिश का अनुमान है। हरियाणा, पंजाब और पश्चिम उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई है, लेकिन इन क्षेत्रों में गेहूं की लगभग पूरी खेती सिंचित है, इसलिए बारिश की कमी का असर सीमित रहने की उम्मीद है।
सरकार ने इस रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जिसमें गेहूं का हिस्सा 121 मिलियन टन है। नवंबर में अच्छी बारिश इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों की नमी का लाभ उठाकर समय पर बुवाई पूरी करें, बीज उपचार में लापरवाही न बरतें और पराली न जलाएं, ताकि खेत और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहें।
