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हरियाणा की सुचिका तारियाल: एशियाई खेलों में MMA का पहला भारतीय पदक, CM सैनी ने कहा — धाकड़ बेटी

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हरियाणा की बेटी सुचिका तारियाल ने एशियाई खेलों में भारत के लिए इतिहास रच दिया है। रोहतक की सुचिका ने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में भारत का पहला एशियाई खेल पदक जीता है और कांस्य पदक अपने नाम किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 31 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देते हुए धाकड़ बेटी कहा और इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व जताया। सुचिका की यह सफलता हरियाणा की खेल परंपरा की एक और मिसाल बन गई है।

आईची-नागोया एशियाई खेल 2026 में एमएमए पहली बार शामिल हुआ था और सुचिका ने महिलाओं की ट्रेडिशनल 60 किलोग्राम वर्ग में पदक जीता। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलमा को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई और इसी के साथ कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लिया। सेमीफाइनल में सिंगापुर की हुई हुन तियो के खिलाफ मुकाबला बराबरी पर रहा और टाईब्रेक के नियम से फैसला हुआ, जिसमें हल्के वजन के आधार पर तियो को विजेता घोषित किया गया। सुचिका फाइनल से चूक गईं, लेकिन कांस्य पदक उनके नाम रहा।

सुचिका का खेल सफर लंबा और संघर्ष भरा रहा है। उन्होंने जूडो से शुरुआत की, जिसमें वे कई बार राष्ट्रीय चैंपियन रहीं और राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद उन्होंने कुराश और जू-जित्सु में भी अपनी पहचान बनाई और 2024 में जू-जित्सु विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। एमएमए में उन्होंने अपनी जूडो पृष्ठभूमि का भरपूर फायदा उठाया, जहां ग्रैपलिंग और थ्रो की तकनीक काम आई। आज वे हरियाणा खेल विभाग में जूनियर कोच के रूप में भी काम कर रही हैं।

मुख्यमंत्री सैनी ने अपने संदेश में सुचिका की मेहनत और जज्बे की सराहना की और कहा कि उनकी उपलब्धि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। हरियाणा के लिए यह गर्व की बात है कि राज्य की एक बेटी ने ऐसे खेल में देश का पहला पदक जीता, जो एशियाई खेलों में पहली बार ही शामिल हुआ था। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सुचिका को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दे चुके हैं।

सुचिका की कहानी उन युवा खिलाड़ियों के लिए संदेश है जो देर से शुरुआत के बावजूद हार नहीं मानते। 36 वर्ष की उम्र में एशियाई खेलों का पदक जीतना यह साबित करता है कि लगन और अनुशासन से किसी भी उम्र में इतिहास रचा जा सकता है। हरियाणा में बेटियों के खेल के प्रति बढ़ता सम्मान और सुविधाएं अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर नतीजे दे रही हैं, और सुचिका का कांस्य पदक इसी का प्रमाण है।


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