दिल्ली गो-दिल्ली फाउंडेशन: स्टार्टअप और युवा उद्यमियों को 50 करोड़ की मदद, प्रोटोटाइप से बाजार तक मिलेगा साथ
दिल्ली के स्टार्टअप और युवा उद्यमियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। दिल्ली सरकार ने गो-दिल्ली फाउंडेशन के गठन को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस फाउंडेशन के लिए शुरुआती तौर पर 50 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस पहल का उद्देश्य राजधानी में स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना है, ताकि युवाओं के नए विचार सिर्फ कागज पर न रहें, बल्कि बाजार तक पहुंचकर सफल कारोबार बन सकें।
फाउंडेशन कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के तहत एक गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में गठित होगा और दिल्ली सरकार के उद्योग विभाग के अंतर्गत काम करेगा। इसके माध्यम से दिल्ली में मौजूद उद्यमशीलता की क्षमता, शिक्षण संस्थानों और शोध सुविधाओं को एक साझा मंच पर लाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस व्यवस्था से नए उद्यमों के विकास, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।
गो-दिल्ली फाउंडेशन के जरिए स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को उत्पाद इंजीनियरिंग, प्रोटोटाइप निर्माण, प्रयोगशालाओं और परीक्षण सुविधाओं तक पहुंच मिलेगी। इसके अलावा तकनीकी मार्गदर्शन, मेंटरशिप, इनक्यूबेशन, कारोबारी सहयोग और निवेशकों से जुड़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। शुरुआती विचार से लेकर उत्पाद विकास, परीक्षण, प्रमाणन की तैयारी और बाजार तक पहुंचने तक हर चरण में उद्यमियों का साथ दिया जाएगा।
दिल्ली में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग से मान्यता प्राप्त करीब 21 हजार स्टार्टअप हैं। फाउंडेशन हब एंड स्पोक मॉडल पर काम करेगा, जिसमें दिल्ली में पहले से उपलब्ध सुविधाओं और भागीदार संस्थानों के माध्यम से कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। सरकारी विभाग भी अपनी वास्तविक चुनौतियों को दिल्ली के नवाचारकर्ताओं के सामने रख सकेंगे, ताकि उनके समाधान स्थानीय युवाओं के विचारों से निकल सकें।
इस पहल से छात्रों, शोधकर्ताओं और नए उद्यमियों को एक ही छत के नीचे संसाधन, मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ने का मौका मिलेगा। सरकार का मानना है कि जब नए विचारों को प्रयोगशाला, परीक्षण और निवेश का साथ मिलेगा, तो दिल्ली का स्टार्टअप तंत्र और मजबूत होगा तथा युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
