हरियाणा MBBS स्नातकों को 2 नवंबर से पहले मिलेंगे मूल दस्तावेज, PG दाखिला बचाने के लिए सरकार ने जारी किए निर्देश
हरियाणा के एमबीबीएस स्नातकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश पा चुके डॉक्टरों के मूल दस्तावेज 2 नवंबर से पहले जारी करने के निर्देश दिए हैं। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय ने प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों को इस बारे में स्पष्ट आदेश जारी किया है, ताकि किसी भी डॉक्टर का पीजी दाखिला दस्तावेज सत्यापन के कारण न अटक जाए।
यह आदेश रोहतक के पीजीआईएमएस, सोनीपत के बीपीएस राजकीय मेडिकल कॉलेज, करनाल के कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज और नूंह के शहीद हसन खान मेवाती राजकीय मेडिकल कॉलेज पर लागू होगा। इन कॉलेजों के वर्ष 2020-21 बैच के करीब 300 स्नातकों ने नीट-पीजी के माध्यम से एमडी और एमएस पाठ्यक्रमों में सीटें हासिल की हैं, लेकिन बॉन्ड पॉलिसी के तहत उनके मूल प्रमाणपत्र कॉलेजों के पास रखे गए थे। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी के शारीरिक दस्तावेज सत्यापन की अंतिम तिथि 2 नवंबर होने के कारण डॉक्टरों के सामने अपने दाखिले को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
नए निर्देशों के अनुसार पीजी अलॉटमेंट लेटर और निर्धारित अंडरटेकिंग जमा करने पर संबंधित कॉलेज विद्यार्थियों के दस्तावेज जारी करेंगे। हरियाणा के भीतर पीजी करने वाले डॉक्टरों के दस्तावेज कॉलेजों के बीच विशेष संदेशवाहक के माध्यम से सीधे भेजे जाएंगे और उन्हें पीजी पूरा होने के तीन महीने के भीतर शेष सरकारी सेवा पूरी करने का वचन देना होगा। राज्य से बाहर पीजी करने वाले डॉक्टरों को मूल दस्तावेज सौंपे जाएंगे, लेकिन उन्हें पाठ्यक्रम पूरा होने के तीन सप्ताह के भीतर अपनी डिग्री और अन्य प्रमाणपत्र अपने मूल कॉलेज में वापस जमा कराने होंगे।
जिन स्नातकों को इस वर्ष पीजी में प्रवेश नहीं मिला है, उनके लिए भी तीन विकल्प तय किए गए हैं। वे बॉन्ड के अनुसार सरकारी सेवा देने की सहमति दे सकते हैं, निर्धारित बॉन्ड राशि का एकमुश्त भुगतान कर सकते हैं या मासिक किस्तों में भुगतान का विकल्प चुन सकते हैं। विद्यार्थियों को अपना विकल्प 2 नवंबर तक देना होगा और कॉलेजों को उनकी जानकारी तय समय में निदेशालय को भेजनी होगी।
दस्तावेज जारी करने में देरी न हो, इसके लिए चारों मेडिकल कॉलेजों के निदेशक और डीन कार्यालयों को शनिवार सहित अवकाश के दिनों में भी खुले रखने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि डॉक्टरों की पढ़ाई और सेवा के बीच दस्तावेजों की अड़चन नहीं आनी चाहिए, और बॉन्ड सेवा की जिम्मेदारी भी बनी रहेगी। इस फैसले से सैकड़ों युवा डॉक्टरों को अपने पीजी प्रशिक्षण की शुरुआत बिना किसी बाधा के करने का रास्ता साफ हो गया है।
