एकता दिवस परेड: नक्सल प्रभावित 126 जिलों के 2000 कलाकार केवडिया में दिखाएंगे संस्कृति की झलक, पीएम मोदी होंगे शामिल
राष्ट्रीय एकता दिवस के इस वर्ष के समारोह में नक्सलवाद पर जीत की झलक दिखेगी। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने 21 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि गुजरात के केवडिया में होने वाली एकता दिवस परेड में देश के नक्सल प्रभावित 126 जिलों के लगभग 2000 कलाकार हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस समारोह में शामिल होंगे।
31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर हर वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है, जिसमें परेड, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और अन्य कार्यक्रम होते हैं। गृह सचिव के अनुसार इस बार नियमित कार्यक्रमों से हटकर कई नई पहलें होंगी, जिनका उद्देश्य नक्सलवाद को समाप्त करने में सुरक्षा बलों की उपलब्धियों को रेखांकित करना और देश की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करना है।
मुख्य आकर्षणों में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के निर्देशन में इन कलाकारों की नाटकीय प्रस्तुति होगी, जिसमें वे सुनाएंगे कि उनके इलाकों में नक्सलवाद के दौर में उनका जीवन और संपत्ति कैसे खतरे में थी। इसके अलावा बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ पर आधारित नाटक और गुजरात में बसे देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों की सांस्कृतिक प्रस्तुति भी होगी।
इन 126 जिलों के लगभग 5000 और लोगों को दर्शक के तौर पर आमंत्रित किया गया है। वे न केवल सभी प्रस्तुतियों के दर्शक बनेंगे, बल्कि यात्रा और ठहराव के दौरान लोगों से बातचीत में अपने अनुभव भी साझा करेंगे — नक्सलियों के हाथों झेली गई कठिनाइयां और अब बदली हुई जिंदगी। गृह सचिव ने कहा कि इन समुदायों की भागीदारी संघर्ष झेलने वाले समाजों की लचक को रेखांकित करेगी और राष्ट्रीय एकीकरण में सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की भूमिका को उजागरेगी।
परेड में नक्सल विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाने वाले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, अन्य केंद्रीय पुलिस संगठनों और राज्य पुलिस के जवानों की टुकड़ियां भी मार्च करेंगी। प्रधानमंत्री के सामने से गुजरते समय LED स्क्रीनों पर इन बलों की शांति-सुरक्षा में भूमिका पर लघु फिल्में दिखाई जाएंगी।
इस वर्ष के समारोह में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष भी मनाए जाएंगे, और केवडिया — जहां विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी है — में पर्यटन को बढ़ावा देने का लक्ष्य भी रखा गया है। आतंक और हिंसा की जगह विकास की लहर का संदेश देता यह आयोजन राष्ट्रीय एकता का उत्सव बनेगा।
