हरियाणा: हिसार में ₹106.28 करोड़ की स्मार्ट सिंचाई योजना, शोधित पानी से 971 किसानों के खेतों तक पहुंचेगा पानी
जल संरक्षण और भूजल संरक्षण की दिशा में बड़े कदम के रूप में हरियाणा सरकार हिसार में ₹106.28 करोड़ की स्मार्ट सिंचाई योजना लागू कर रही है। इस योजना के तहत हिसार शहर के शोधित अपशिष्ट जल को भूमिगत दबाव वाली पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए तीन गांवों के 971 किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इससे कृषि क्षेत्र की ट्यूबवेल और नहर के पानी पर निर्भरता काफी कम होगी।
शुक्रवार को गवाड़ गांव में आयोजित सीधे किसान संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के OSD वीरेंद्र सिंह बाढ़खालसा ने योजना का खाका पेश किया और पानी की गुणवत्ता, सिंचाई शेड्यूलिंग, बिजली लागत और रखरखाव जैसे किसानों के सवालों के विस्तार से जवाब दिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शोधित पानी की गुणवत्ता पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और परियोजना से किसानों का खर्च बढ़ने की बजाय लाभ ही होगा।
इस परियोजना की पृष्ठभूमि पानीहार-चौधरीवास स्मार्ट सिंचाई क्लस्टर से जुड़ी है। इसके तहत रोजाना लगभग 17 मिलियन लीटर शोधित अपशिष्ट जल से करीब 1,700 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होगी। क्षेत्र के तीन सीवेज उपचार संयंत्रों — जिनमें सत्रोड और दाबड़ा भी शामिल हैं — का शोधित पानी बंद पाइपलाइन नेटवर्क से खेतों तक पहुंचेगा। इस क्लस्टर की समीक्षा बैठक चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री के OSD की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें परियोजना को टिकाऊ सिंचाई का मॉडल बनाने और राज्य के अन्य जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में दोहराने पर जोर दिया गया था।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बलदेव राज कंबोज ने कहा था कि पानी की उपलब्धता और भूजल संरक्षण कृषि के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। वैज्ञानिक रूप से शोधित और सुरक्षित पुन: उपयोग किया गया अपशिष्ट जल भूजल पर दबाव कम करते हुए सिंचाई का वैकल्पिक स्रोत दे सकता है। शोध निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने परियोजना की प्रगति और किसानों के साथ समन्वय में विश्वविद्यालय की भूमिका की जानकारी दी थी।
बैठक में पाइपलाइन नेटवर्क, जल पुन: उपयोग, किसानों की भागीदारी और परियोजना के दीर्घकालिक संचालन व रखरखाव की भी समीक्षा हुई। बाढ़खालसा ने परियोजना को समय पर और गुणवत्तापूर्ण पूरा करने, मैदान-स्तर की समस्याओं का समाधान और किसानों की अधिक भागीदारी की जरूरत पर बल दिया। हरियाणा सरकार का लक्ष्य इस अनुभव से राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी सिंचाई प्रणालियां विकसित करना है।
