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Haryana Police Online FIR Kaise Kare: e-FIR, Lost Report, Complaint, FIR Download

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: Haryana Police Online FIR Kaise Kare: e-FIR, Lost Report, Complaint, FIR Download
  • तारीख़: 7 नवम्बर 2026, 6:31 पूर्वाह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: उपयोगी जानकारी
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

हरियाणा पुलिस ऑनलाइन एफआईआर — सबसे पहले यह समझें

हरियाणा में पुलिस से जुड़ी कई सेवाएँ अब ऑनलाइन मिलती हैं — शिकायत दर्ज करना, खोई हुई चीज़ की रिपोर्ट देना, दर्ज FIR की प्रति डाउनलोड करना और अपनी शिकायत की स्थिति देखना। ये सेवाएँ हरियाणा पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट haryanapolice.gov.in पर Citizen Services / Citizen Login से मिलती हैं। नागरिक सेवाओं के इस पोर्टल को “हर समय” (HarSamay) कहा जाता है, और हरियाणा पुलिस की कुछ सेवाएँ SARAL Haryana पोर्टल से भी जुड़ी हुई हैं।

सबसे ज़रूरी बात — ऑनलाइन शिकायत की पावती अपने आप FIR नहीं होती। आप पोर्टल पर जो जानकारी देते हैं, वह पहले संबंधित जिला कार्यालय और फिर थाने तक जाकर जाँची जाती है। FIR तभी दर्ज होती है जब आपकी जानकारी में कोई संज्ञेय अपराध (cognizable offence) बनता हो और पुलिस उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 173 के तहत दर्ज करे। इसलिए ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद मिली पावती या रेफरेंस नंबर को FIR नंबर न समझें — FIR दर्ज हुई या नहीं, यह थाने से या पोर्टल की स्थिति-जाँच सेवा से पता करें।

एक और ज़रूरी चेतावनी: हरियाणा पुलिस के पोर्टल के लेबल और बटन समय-समय पर बदलते रहते हैं। 3 नवंबर 2026 को समीक्षा किए गए कानूनी गाइड के अनुसार पुराना सीधा शिकायत-फॉर्म लिंक बदल चुका हो सकता है। इसलिए इस गाइड में बताए गए कदमों के साथ-साथ पोर्टल पर दिख रहे वर्तमान विकल्पों को ही अंतिम मानें — किसी पुराने स्क्रीनशॉट या किसी अन्य वेबसाइट के लिंक पर भरोसा करके अपनी जानकारी न डालें।

एक नज़र में — हरियाणा पुलिस ऑनलाइन सेवाएँ

विवरण जानकारी
आधिकारिक वेबसाइट haryanapolice.gov.in
नागरिक सेवा पोर्टल “हर समय” (HarSamay) — Citizen Services / Citizen Login
ऑनलाइन e-FIR सिर्फ कुछ अपराधों के लिए — आरोपी अज्ञात हो या संपत्ति से जुड़ा अपराध हो
Lost Article Report खोई (चोरी नहीं हुई) चीज़ों के लिए — डुप्लीकेट दस्तावेज़ बनवाने के काम आती है
सामान्य शिकायत आम शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं — पावती मिलती है, FIR अपने आप नहीं बनती
FIR Download जिला + थाना + FIR नंबर + वर्ष से दर्ज FIR की प्रति खोजी जा सकती है
आपातकालीन नंबर 112 (पुलिस, फायर, एंबुलेंस — एकल आपात नंबर)
साइबर धोखाधड़ी 1930 (हेल्पलाइन) / cybercrime.gov.in
चोरी/गुम मोबाइल IMEI ब्लॉक ceir.gov.in (Sanchar Saathi / CEIR) — पुलिस शिकायत/FIR नंबर चाहिए
कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) — 1 जुलाई 2024 से लागू
FIR की प्रति का शुल्क शिकायतकर्ता/पीड़ित को मुफ्त (BNSS धारा 173(2))

e-FIR, Lost Report, शिकायत और FIR Download में क्या अंतर है?

यही अंतर इस गाइड का सबसे अहम हिस्सा है — गलत विकल्प चुनने पर आपकी रिपोर्ट या तो गलत जगह दर्ज होगी या उसका वह असर नहीं होगा जिसकी आप उम्मीद कर रहे हैं।

सेवा किसके लिए क्या मिलता है जाँच होती है?
e-FIR (ऑनलाइन FIR) संज्ञेय अपराध की जानकारी — आरोपी अज्ञात हो, या संपत्ति से जुड़ा अपराध हो (वाहन चोरी, मोबाइल चोरी, आरोपी अज्ञात होने पर घर में चोरी, बिना चोट वाली छिनतई) शिकायत दर्ज होने की पावती; पुलिस जाँच के बाद BNSS धारा 173 के तहत FIR दर्ज हो सकती है हाँ — पुलिस जाँच करती है
Lost Article / Lost Property Report खोई हुई चीज़ें — चोरी नहीं हुई, गुम हुईं: बटुआ, मोबाइल, आधार, पैन, ड्राइविंग लाइसेंस, शैक्षणिक प्रमाण पत्र तुरंत डिजिटल हस्ताक्षरित पावती/रिपोर्ट नंबर (एग्रीगेटर स्रोतों के अनुसार) — डुप्लीकेट दस्तावेज़ बनवाने के काम आती है आमतौर पर नहीं — यह दस्तावेज़ीकरण के लिए होती है
सामान्य शिकायत (Complaint Registration) आम शिकायतें, जन-शिकायतें, पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़ी शिकायतें पावती/रेफरेंस नंबर; शिकायत जिला कार्यालय से थाने भेजी जाती है शिकायत के अनुसार — लेकिन पावती का मतलब FIR दर्ज होना नहीं है
FIR Download पहले से दर्ज FIR की प्रति चाहिए उपलब्ध FIR की प्रति (डाउनलोड/प्रिंट) लागू नहीं — यह पुराने रिकॉर्ड की खोज है

याद रखें: चोरी हुई चीज़ के लिए e-FIR/शिकायत होती है; गुम हुई चीज़ के लिए Lost Article Report होती है। दोनों को एक न समझें — डुप्लीकेट आधार या लाइसेंस बनवाने के लिए Lost Report ही माँगी जाती है, और चोरी की जाँच के लिए FIR की ज़रूरत होती है।

किन मामलों में ऑनलाइन e-FIR कर सकते हैं — और किनमें नहीं

ऑनलाइन e-FIR हर अपराध के लिए नहीं है। हरियाणा पुलिस की ऑनलाइन सुविधा उन मामलों के लिए है जिनमें थाने में तुरंत मौजूदगी की ज़रूरत नहीं पड़ती।

ऑनलाइन e-FIR के लिए उपयुक्त मामले

  • वाहन चोरी — बाइक, स्कूटर या कार चोरी (आरोपी अज्ञात हो)
  • मोबाइल चोरी — फोन चोरी हुआ हो (IMEI नंबर साथ रखें — CEIR पर ब्लॉक करने के काम आएगा)
  • घर में चोरी / सेंधमारी — आरोपी अज्ञात हो
  • बिना चोट वाली छिनतई (snatching) — जिसमें आपको शारीरिक चोट न लगी हो
  • ऐसे संपत्ति-संबंधी अपराध जिनमें आरोपी का पता न हो

इन मामलों में ऑनलाइन पर भरोसा न करें — सीधे थाने जाएँ या 112 डायल करें

  • गंभीर अपराध — हत्या, डकैती, दुष्कर्म जैसे मामले
  • चोट वाला अपराध — मारपीट, चोट पहुँचाकर लूट या छिनतई
  • आरोपी ज्ञात हो — जब आपको पता हो कि अपराध किसने किया है
  • यौन अपराध या बच्चों से जुड़े मामले — इनमें विशेष प्रक्रिया और गोपनीयता के नियम लागू होते हैं; सीधे थाने या महिला/बाल सहायता सेवाओं से संपर्क करें
  • जारी अपराध या तत्काल खतरा — अपराध अभी हो रहा हो या जान को खतरा हो तो ऑनलाइन फॉर्म भरने में समय बर्बाद न करें, तुरंत 112 डायल करें

हरियाणा पुलिस ऑनलाइन e-FIR कैसे करें — कदम-दर-कदम

ध्यान दें: नीचे दिए गए कदम हरियाणा पुलिस के नागरिक सेवा पोर्टल की वर्तमान संरचना के अनुसार हैं — पोर्टल के लेबल बदल सकते हैं। हर कदम पर पोर्टल पर दिख रहा वर्तमान विकल्प ही चुनें। यह पैकेज 7 नवंबर 2026 को तैयार हुआ है; लाइव पोर्टल haryanapolice.gov.in उस दिन सीधे फेच नहीं हो पाया था, इसलिए प्रकाशन से पहले पोर्टल के वर्तमान लेबल ज़रूर मिलाए जाएँ।

चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट haryanapolice.gov.in खोलें।

चरण 2: होमपेज पर Citizen Services या Citizen Login विकल्प खोजें। यही HarSamay नागरिक सेवा पोर्टल का रास्ता है। किसी अन्य वेबसाइट के “ऑनलाइन FIR” लिंक से फॉर्म न भरें।

चरण 3: नए उपयोगकर्ता हैं तो रजिस्टर / Sign Up करें — नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल पता, पहचान विवरण और आवासीय पता माँगा जा सकता है। पहले से खाता है तो अपनी जानकारी से लॉगिन करें और OTP या सुरक्षा सत्यापन पूरा करें।

चरण 4: उपलब्ध सेवाओं में से Complaint Registration या उसके बराबर का विकल्प चुनें। पोर्टल पर e-FIR और सामान्य शिकायत के अलग विकल्प दिख सकते हैं — अपने मामले के हिसाब से सही विकल्प चुनें।

चरण 5: फॉर्म में जिला और थाना चुनें (यदि सेवा माँगे), फिर घटना की तारीख, समय, स्थान, संबंधित लोग, घटना की प्रकृति और तथ्यात्मक विवरण क्रम से लिखें।

चरण 6: जहाँ सुविधा हो, सहायक दस्तावेज़ अपलोड करें — फोटो, रसीद, संदेश, लेन-देन की जानकारी या अन्य सबूत। मूल सबूत अपने पास सुरक्षित रखें।

चरण 7: विवरण जाँचकर फॉर्म सबमिट करें और पावती / रेफरेंस नंबर सहेजकर रखें।

चरण 8: पोर्टल की शिकायत-स्थिति सेवा से या संबंधित थाने से संपर्क करके पता करें कि FIR दर्ज हुई है या नहीं। पावती मिलना = FIR दर्ज होना नहीं है।

महत्वपूर्ण — 3 दिन का हस्ताक्षर नियम: BNSS धारा 173(1)(ii) के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी गई जानकारी तभी रिकॉर्ड पर ली जाती है जब शिकायतकर्ता उस पर 3 दिन के भीतर हस्ताक्षर कर दे। इसलिए ऑनलाइन शिकायत के बाद थाने जाकर या पोर्टल की प्रक्रिया से हस्ताक्षर की औपचारिकता पूरी करना न भूलें — नहीं तो आपकी जानकारी रिकॉर्ड पर नहीं ली जाएगी।

Lost Article / Lost Property Report कैसे करें

अगर आपकी कोई चीज़ गुम हुई है, चोरी नहीं हुई — जैसे बटुआ, मोबाइल, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या शैक्षणिक प्रमाण पत्र — तो Lost Article Report (LAR) दर्ज करें। यह रिपोर्ट डुप्लीकेट दस्तावेज़ बनवाने के लिए ज़रूरी होती है।

चरण 1: HarSamay / SARAL Haryana पोर्टल खोलें — शुरुआत haryanapolice.gov.in के Citizen Services से करें।

चरण 2: लॉगिन करें या नया खाता बनाएँ (मोबाइल नंबर से)।

चरण 3: “Lost Article Report” / “Registration of Lost Property” या पोर्टल पर दिख रहा उसके बराबर का विकल्प चुनें।

चरण 4: खोई चीज़ का विवरण भरें — चीज़ का प्रकार, खोने की तारीख-समय व स्थान, पहचान के निशान, सीरियल नंबर या IMEI (मोबाइल के लिए)।

चरण 5: फॉर्म सबमिट करें — एग्रीगेटर स्रोतों के अनुसार सबमिट करते ही एक अनूठा Lost Article Report नंबर बनता है और डिजिटल हस्ताक्षरित पावती तुरंत प्रिंट/डाउनलोड की जा सकती है। (यह पावती-प्रक्रिया सत्यापित नहीं हुई है — विभाग से जाँच लें।)

चरण 6: रिपोर्ट नंबर सहेजकर रखें — डुप्लीकेट दस्तावेज़ के आवेदन में यही नंबर काम आएगा। बाद में रिपोर्ट दोबारा निकालने के लिए पोर्टल पर रिपोर्ट नंबर या अपनी जानकारी से खोजा जा सकता है।

ध्यान दें: Lost Article Report के बाद आमतौर पर कोई पुलिस जाँच नहीं होती — यह दस्तावेज़ीकरण के लिए होती है। अगर बाद में पता चले कि चीज़ गुम नहीं, चोरी हुई थी, तो थाने जाकर e-FIR/शिकायत दर्ज कराएँ।

सामान्य शिकायत (Complaint Registration) कैसे करें

आम शिकायतों — जैसे पड़ोस का विवाद, पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़ी शिकायत या कोई ऐसी घटना जो FIR के दायरे में न आती हो — के लिए सामान्य शिकायत दर्ज की जाती है।

चरण 1: haryanapolice.gov.in खोलकर Citizen Services / Citizen Login पर जाएँ।

चरण 2: लॉगिन करें या नया खाता बनाएँ।

चरण 3: Complaint Registration विकल्प चुनें।

चरण 4: जिला व थाना चुनें, घटना का विवरण तथ्यात्मक रूप से लिखें और ज़रूरी दस्तावेज़/सबूत अपलोड करें।

चरण 5: सबमिट करके पावती/रेफरेंस नंबर सहेजें। शिकायत संबंधित जिला कार्यालय को जाती है और वहाँ से थाने भेजी जाती है।

चरण 6: पोर्टल की स्थिति-जाँच सेवा से या थाने से संपर्क करके शिकायत पर हुई कार्रवाई जानें।

याद रखें: सामान्य शिकायत की पावती FIR नहीं होती। अगर आपकी शिकायत में संज्ञेय अपराध बनता है तो पुलिस उसे FIR में बदल सकती है — लेकिन यह पुलिस की जाँच पर निर्भर करता है। शिकायतकर्ता को दर्ज जानकारी की प्रति मुफ्त मिलनी चाहिए (BNSS धारा 173(2))।

FIR Download — दर्ज FIR की प्रति ऑनलाइन कैसे निकालें

अगर आपकी FIR पहले से दर्ज है और उसकी प्रति चाहिए, तो पोर्टल की FIR Download सेवा से खोजा जा सकता है।

चरण 1: haryanapolice.gov.in खोलकर Citizen Services में जाएँ।

चरण 2: FIR Download या उसके बराबर का विकल्प (जैसे View FIR / FIR Search) चुनें।

चरण 3: यदि माँगा जाए तो लॉगिन करें या सत्यापन पूरा करें।

चरण 4: खोज का विवरण भरें — FIR दर्ज होने का वर्ष, जिला और थाना। जहाँ माँगा जाए, FIR नंबर या दर्ज होने का महीना भी दें।

चरण 5: Search दबाकर मिलने वाला रिकॉर्ड देखें — जहाँ सुविधा हो, प्रति खोलें, प्रिंट करें या सहेजें।

चरण 6: परिणाम न मिले तो जिला, थाने का नाम, वर्ष और FIR नंबर की स्पेलिंग दोबारा जाँचें; फिर भी न मिले तो संबंधित थाने या जिला पुलिस कार्यालय से संपर्क करें।

ध्यान देने योग्य बातें:

  • पहले के इंटरफेस में वर्ष, जिला और थाना मुख्य खोज-फ़ील्ड थे; महीना व FIR नंबर वैकल्पिक थे। वर्तमान फ़ील्ड, लॉगिन की ज़रूरत और खोज के विकल्प अलग हो सकते हैं — सत्यापित नहीं हुआ है, पोर्टल पर दिख रहे वर्तमान फ़ील्ड ही अंतिम मानें।
  • हर FIR ऑनलाइन नहीं मिलती। कुछ FIR — खासकर यौन अपराध जैसे संवेदनशील मामलों की — सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई जातीं; रिकॉर्ड अभी प्रकाशित न हुआ हो या जाँच/गोपनीयता के कारण छिपाया गया हो, यह भी हो सकता है। ऑनलाइन परिणाम न मिलना यह साबित नहीं करता कि FIR दर्ज नहीं हुई।
  • FIR की प्रति बनाम FIR की स्थिति अलग-अलग चीज़ें हैं। FIR की प्रति दर्ज जानकारी की नकल होती है; FIR की स्थिति का मतलब है जाँच की प्रगति — जो पूरी तरह सार्वजनिक नहीं होती। FIR डाउनलोड करने से यह पता नहीं चलता कि जाँच पूरी हुई, चार्जशीट दाखिल हुई या कोर्ट ने फैसला दिया।
  • ऑनलाइन प्रति न मिले तो शिकायतकर्ता/पीड़ित थाने से BNSS धारा 173(2) के तहत मुफ्त प्रति माँग सकता है।

Zero FIR क्या है — BNSS धारा 173(1)

Zero FIR का मतलब है कि संज्ञेय अपराध की जानकारी उस थाने में भी दी जा सकती है जिसके क्षेत्र में अपराध हुआ ही न हो — जानकारी किसी भी थाने के प्रभारी अधिकारी को मौखिक रूप से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी जा सकती है, चाहे अपराध कहीं भी हुआ हो। संबंधित थाना जानकारी दर्ज करके उसे सक्षम थाने को भेज देता है। क्षेत्राधिकार की उलझन के कारण रिपोर्टिंग में देरी नहीं होनी चाहिए।

BNSS प्रावधान क्या कहता है
धारा 173(1) संज्ञेय अपराध की जानकारी मौखिक या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से, अपराध के स्थान से परे — किसी भी थाने में दी जा सकती है (Zero FIR)। मौखिक जानकारी लिखित में दर्ज करके शिकायतकर्ता को पढ़कर सुनाई जाती है।
धारा 173(1)(ii) इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी गई जानकारी 3 दिन के भीतर शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर पर ही रिकॉर्ड पर ली जाती है।
धारा 173(2) दर्ज जानकारी की प्रति शिकायतकर्ता/पीड़ित को तुरंत और मुफ्त दी जाएगी।
धारा 173(3) 3 वर्ष से अधिक पर 7 वर्ष से कम सज़ा वाले संज्ञेय अपराधों में, DSP से कम रैंक के अधिकारी की पूर्व अनुमति से, अधिकारी 14 दिन के भीतर प्रारंभिक जाँच कर सकता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। यह FIR दर्ज करने से इनकार का सामान्य अधिकार नहीं है।
धारा 173(4) यदि थाना प्रभारी जानकारी दर्ज करने से इनकार करे तो पीड़ित व्यक्ति लिखित में, डाक द्वारा संबंधित पुलिस अधीक्षक (SP) को शिकायत भेज सकता है। SP संतुष्ट हों तो स्वयं जाँच करें या अधीनस्थ अधिकारी को निर्देश दें। राहत न मिले तो मजिस्ट्रेट के पास आवेदन किया जा सकता है।
धारा 174 गैर-संज्ञेय अपराध की जानकारी अलग रजिस्टर में दर्ज होती है और शिकायतकर्ता को मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाता है — पुलिस सामान्यतः सक्षम मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना ऐसे मामले की जाँच नहीं कर सकती।
धारा 175(3) मजिस्ट्रेट शपथ-पत्र के साथ दिए आवेदन पर जाँच का आदेश दे सकता है — यह पोर्टल पर स्थिति देखने से अलग कानूनी उपाय है।

BNSS 1 जुलाई 2024 से लागू है। अपराध का वर्गीकरण भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) या संबंधित विशेष कानून पर निर्भर करता है। मूल कानूनी पाठ indiacode.nic.in पर देखा जा सकता है।

आपातकालीन नंबर — 112, 1930 और CEIR

नंबर / पोर्टल किस काम के लिए
112 आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) — पुलिस, फायर और एंबुलेंस के लिए देश का एकल आपात नंबर। जारी अपराध, तत्काल खतरा या तुरंत पुलिस मदद के लिए 112 डायल करें। ऑनलाइन शिकायत का इंतज़ार न करें।
100 पुलिस कंट्रोल रूम (PCR) — तत्काल पुलिस सहायता के लिए।
1930 राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन — ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी (UPI फ्रॉड, फर्जी निवेश, फिशिंग) का पता चलते ही तुरंत कॉल करें; साथ ही अपने बैंक को भी सूचित करें।
cybercrime.gov.in राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल — ऑनलाइन धोखाधड़ी, हैकिंग, पहचान की चोरी, सोशल मीडिया दुरुपयोग, साइबर पीछा आदि की शिकायत।
ceir.gov.in CEIR (Central Equipment Identity Register) — Sanchar Saathi के ज़रिए चोरी/गुम मोबाइल का IMEI सभी नेटवर्क पर ब्लॉक करवाएँ। इसके लिए पुलिस शिकायत/FIR नंबर चाहिए — पहले पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराएँ, फिर IMEI ब्लॉक करें। IMEI, मोबाइल नंबर, खोने की जगह-तारीख, थाने का विवरण व अपनी पहचान की जानकारी देनी होती है।

मोबाइल चोरी होने पर सही क्रम: (1) तुरंत 112 या थाने को सूचित करें / ऑनलाइन e-FIR या शिकायत दर्ज करें; (2) अपने टेलीकॉम ऑपरेटर से SIM ब्लॉक करवाएँ; (3) ceir.gov.in पर “Block Stolen/Lost Mobile” से IMEI ब्लॉक करें — पुलिस शिकायत/FIR नंबर साथ रखें; (4) अगर बैंक/वॉलेट से जुड़ी धोखाधड़ी का खतरा हो तो 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

साइबर धोखाधड़ी में पैसे गए हों तो: सबसे पहले 1930 पर कॉल करें, फिर अपने बैंक के आधिकारिक फ्रॉड-रिपोर्टिंग चैनल से संपर्क करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत पूरी करें। जल्दी रिपोर्ट करने से रकम रोकने की कोशिश में मदद मिल सकती है — लेकिन पैसे की वापसी की गारंटी नहीं होती।

ऑनलाइन फॉर्म भरने से पहले तैयार रखें — ज़रूरी जानकारी व दस्तावेज़

  • शिकायतकर्ता का पूरा नाम, संपर्क विवरण और वर्तमान पता।
  • पहचान विवरण — जो पोर्टल माँगे, सिर्फ वही जानकारी दें।
  • घटना की तारीख, अनुमानित समय, सटीक स्थान और क्या हुआ — साफ, तथ्यात्मक विवरण।
  • संदिग्ध व्यक्तियों के नाम या विवरण और गवाहों के नाम, यदि ज्ञात हों।
  • संबंधित रिकॉर्ड — संदेश, रसीद, फोटो, लेन-देन ID या अन्य सबूत, जहाँ उपलब्ध हों।
  • चोरी या गुम संपत्ति के लिए — पहचान के निशान, सीरियल नंबर, IMEI या वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर, यदि उपलब्ध हो।
  • दस्तावेज़ न होने पर भी गंभीर अपराध की रिपोर्ट में देरी न करें — सच जानकारी दें और संवेदनशील सबूत गैर-आधिकारिक वेबसाइटों पर साझा न करें।

ध्यान देने योग्य बातें — आम गलतियाँ और सावधानियाँ

  • पावती को FIR न समझें — ऑनलाइन शिकायत की पावती/रेफरेंस नंबर FIR नंबर नहीं होता; FIR दर्ज हुई या नहीं, थाने या पोर्टल की स्थिति-सेवा से जाँचें।
  • 3 दिन के भीतर हस्ताक्षर ज़रूरी — इलेक्ट्रॉनिक जानकारी पर हस्ताक्षर न हुए तो वह रिकॉर्ड पर नहीं ली जाएगी।
  • गलत जानकारी न दें — जानबूझकर झूठी जानकारी देने पर कानूनी परिणाम हो सकते हैं; अप्रमाणित आरोप अपने आप झूठी शिकायत नहीं होता, लेकिन तथ्यों से छेड़छाड़ न करें।
  • फर्ज़ी वेबसाइटों से बचें — FIR/शिकायत सिर्फ haryanapolice.gov.in (Citizen Services) या SARAL Haryana से दर्ज करें। “FIR डाउनलोड” के नाम पर किसी अन्य साइट पर लॉगिन जानकारी या पैसे न दें — FIR की प्रति शिकायतकर्ता को मुफ्त मिलती है।
  • गंभीर मामलों में ऑनलाइन का इंतज़ार न करें — जारी अपराध, चोट या खतरे में सीधे 112 डायल करें या नज़दीकी थाने जाएँ।
  • चोरी और गुम में फर्क रखें — चोरी के लिए e-FIR/शिकायत, गुम चीज़ के लिए Lost Article Report। गलत विकल्प से काम अटक सकता है।
  • पुराने स्क्रीनशॉट पर भरोसा न करें — पोर्टल के लेबल बदलते रहते हैं; हर बार पोर्टल पर दिख रहे वर्तमान विकल्प ही चुनें।
  • महिला सुरक्षा ऐप: हरियाणा पुलिस का ‘दुर्गा शक्ति — द रक्षक’ ऐप भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए उपलब्ध है (एग्रीगेटर स्रोतों के अनुसार)।
  • तकनीकी समस्या हो तो: नागरिक सेवाओं की तकनीकी सहायता के लिए एग्रीगेटर स्रोतों में ईमेल [email protected] व फोन +91 172 2587900 दिए गए हैं — सत्यापित नहीं हुआ है — विभाग से जाँच लें।
  • शिकायत का निवारण न हो तो: FIR दर्ज करने से इनकार पर SP को डाक से लिखित शिकायत (BNSS धारा 173(4)); पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़ी शिकायतों के लिए CM Window (हरियाणा) के ज़रिए जन-शिकायत का रास्ता भी है — CM Window की पूरी जानकारी हमारी अलग गाइड में देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. क्या हरियाणा में ऑनलाइन FIR दर्ज की जा सकती है?

हाँ — कुछ मामलों में। आरोपी अज्ञात हो या संपत्ति से जुड़ा अपराध हो (वाहन चोरी, मोबाइल चोरी, आरोपी अज्ञात होने पर घर में चोरी, बिना चोट वाली छिनतई) तो haryanapolice.gov.in के Citizen Services / HarSamay पोर्टल से ऑनलाइन जानकारी दी जा सकती है। लेकिन ऑनलाइन पावती अपने आप FIR नहीं होती — पुलिस जाँच के बाद BNSS धारा 173 के तहत FIR दर्ज होती है, और इलेक्ट्रॉनिक जानकारी पर 3 दिन के भीतर हस्ताक्षर ज़रूरी है।

2. ऑनलाइन शिकायत और FIR में क्या अंतर है?

ऑनलाइन शिकायत पुलिस को दी गई जानकारी या शिकायत है — वह जाँची जा सकती है, संबंधित थाने भेजी जा सकती है या उस पर कार्रवाई हो सकती है। FIR संज्ञेय अपराध की जानकारी का औपचारिक दर्ज होना है (BNSS धारा 173)। शिकायत की पावती मिलने का मतलब FIR दर्ज होना नहीं है।

3. Lost Article Report और FIR में क्या फर्क है?

Lost Article Report गुम हुई (चोरी नहीं हुई) चीज़ों के लिए होती है — बटुआ, मोबाइल, आधार, पैन, लाइसेंस — और डुप्लीकेट दस्तावेज़ बनवाने के काम आती है; इसके बाद आमतौर पर कोई जाँच नहीं होती। FIR चोरी या अपराध की जाँच के लिए होती है। चोरी हुई चीज़ के लिए FIR/शिकायत दर्ज कराएँ, गुम चीज़ के लिए Lost Report।

4. HarSamay पोर्टल क्या है — क्या यह haryanapolice.gov.in से अलग है?

HarSamay (“हर समय”) हरियाणा पुलिस की नागरिक सेवाओं का पोर्टल है — शुरुआत haryanapolice.gov.in पर Citizen Services / Citizen Login से होती है। स्रोतों में इसके दो पते मिलते हैं (harsamay.gov.in और haryanapoliceonline.gov.in) और पुराना सीधा लॉगिन लिंक बदल चुका हो सकता है — इसलिए हमेशा haryanapolice.gov.in से शुरू करें और पोर्टल पर दिख रहे वर्तमान विकल्प ही चुनें।

5. दर्ज FIR की प्रति ऑनलाइन कैसे डाउनलोड करें?

haryanapolice.gov.in → Citizen Services → FIR Download विकल्प चुनें → FIR दर्ज होने का वर्ष, जिला और थाना भरें (जहाँ माँगा जाए, FIR नंबर या महीना भी दें) → Search करके उपलब्ध प्रति खोलें/सहेजें। हर FIR ऑनलाइन नहीं मिलती — संवेदनशील मामलों की FIR सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई जाती। प्रति न मिले तो थाने से BNSS धारा 173(2) के तहत मुफ्त प्रति माँगें।

6. Zero FIR क्या होती है?

Zero FIR का मतलब है कि संज्ञेय अपराध की जानकारी किसी भी थाने में दी जा सकती है, चाहे अपराध किसी और थाने के क्षेत्र में हुआ हो (BNSS धारा 173(1))। जानकारी दर्ज करके सक्षम थाने को भेज दी जाती है। क्षेत्राधिकार की उलझन से रिपोर्टिंग में देरी नहीं होनी चाहिए।

7. ऑनलाइन शिकायत के बाद क्या करना ज़रूरी है?

दो काम — पहला, इलेक्ट्रॉनिक जानकारी पर 3 दिन के भीतर हस्ताक्षर करें (BNSS धारा 173(1)(ii)), नहीं तो जानकारी रिकॉर्ड पर नहीं ली जाएगी। दूसरा, पोर्टल की स्थिति-सेवा या थाने से पता करें कि FIR दर्ज हुई या नहीं — पावती को FIR न समझें।

8. चोरी हुए मोबाइल का IMEI कैसे ब्लॉक करें?

पहले पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराएँ (ऑनलाइन e-FIR/शिकायत या थाने में) और शिकायत/FIR नंबर सहेजें। फिर ceir.gov.in (Sanchar Saathi / CEIR) पर “Block Stolen/Lost Mobile” चुनकर IMEI, मोबाइल नंबर, खोने की जगह-तारीख, थाने का विवरण व अपनी पहचान की जानकारी भरें। IMEI सभी नेटवर्क पर ब्लॉक हो जाता है। साथ ही अपने ऑपरेटर से SIM भी ब्लॉक करवाएँ।

9. साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें — 1930 या 112?

ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी (UPI फ्रॉड, फर्जी निवेश, फिशिंग) का पता चलते ही तुरंत 1930 पर कॉल करें, अपने बैंक को सूचित करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जान को खतरा हो या अपराध जारी हो तो 112 डायल करें।

10. पुलिस FIR दर्ज करने से इनकार करे तो क्या करें?

BNSS धारा 173(4) के अनुसार लिखित में, डाक द्वारा संबंधित पुलिस अधीक्षक (SP) को शिकायत भेजें। SP संतुष्ट हों तो स्वयं जाँच करें या अधीनस्थ अधिकारी को निर्देश दें। राहत न मिले तो मजिस्ट्रेट के पास आवेदन किया जा सकता है (धारा 175(3))।

आधिकारिक स्रोत और महत्वपूर्ण लिंक

अस्वीकरण: यह गाइड सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है, किसी विशेष मामले की कानूनी सलाह नहीं। पोर्टल के लेबल, फ़ील्ड और उपलब्ध सेवाएँ बदल सकती हैं — हर बार आधिकारिक पोर्टल पर दिख रही ताज़ा जानकारी ही अंतिम मानी जाए। इस गाइड में जहाँ भी “सत्यापित नहीं हुआ है — विभाग से जाँच लें” लिखा है, वह जानकारी प्रकाशित स्रोतों पर आधारित है, आधिकारिक पोर्टल पर सीधे सत्यापित नहीं हुई है (7 नवंबर 2026 को haryanapolice.gov.in सीधे फेच नहीं हो पाया था)। आपात स्थिति में 112 डायल करें; किसी विशेष मामले में योग्य कानूनी सलाहकार से संपर्क करें।

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