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हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: विदेश दौरे की फाइल अब सीधे CM तक नहीं जाएगी, मुख्य सचिव करेंगे 4 बिंदुओं पर जांच

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हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के विदेश दौरों की मंजूरी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के विदेश दौरे का प्रस्ताव सीधे मुख्यमंत्री के पास अंतिम मंजूरी के लिए नहीं भेजा जा सकेगा। इससे पहले हर प्रस्ताव की मुख्य सचिव कार्यालय में प्रारंभिक जांच अनिवार्य होगी। यह नई व्यवस्था मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से 30 अक्टूबर 2026 को अधिसूचित की गई है।

इस व्यवस्था का दायरा केवल वरिष्ठ अधिकारियों तक सीमित नहीं है। यह अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के साथ-साथ राज्य सरकार के ग्रुप-ए, ग्रुप-बी, ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होगी। इसके अलावा सरकारी बोर्डों, निगमों और वैधानिक निकायों के कार्मिकों के विदेश यात्रा प्रस्ताव भी इसी प्रक्रिया से गुजरेंगे। यानी नीचे से ऊपर तक, हर स्तर के प्रस्ताव के लिए एक ही जांच प्रक्रिया तय कर दी गई है।

सरकार के संज्ञान में आया था कि विभिन्न विभागों की ओर से आधिकारिक विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और विदेश यात्राओं से संबंधित प्रस्ताव सीधे मुख्यमंत्री के पास भेजे जा रहे थे। इससे प्रस्तावों की पात्रता, आवश्यकता और वित्तीय औचित्य की समुचित परख नहीं हो पाती थी। नई व्यवस्था के तहत विभागों को अब निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करते हुए प्रस्ताव मुख्य सचिव कार्यालय के माध्यम से भेजने होंगे। मुख्य सचिव कार्यालय केवल कैडर संबंधी अनापत्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रत्येक प्रस्ताव की विस्तृत समीक्षा करेगा।

जांच के दौरान चार प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पहला, संबंधित अधिकारी या कर्मचारी विदेश यात्रा के लिए निर्धारित सेवा नियमों के अनुसार पात्र है या नहीं। दूसरा, वह पहले कितनी बार विदेश जा चुका है और उसकी पिछली यात्राओं का रिकॉर्ड क्या है। तीसरा, प्रस्तावित दौरे की प्रशासनिक आवश्यकता कितनी है और इससे विभाग तथा प्रदेश को क्या लाभ मिलने की संभावना है। चौथा, यात्रा के लिए संबंधित विभाग के बजट में पर्याप्त वित्तीय प्रावधान उपलब्ध है या नहीं। इन चारों कसौटियों पर खरा उतरने वाला प्रस्ताव ही आगे बढ़ेगा।

यह व्यवस्था आधिकारिक प्रतिनिधिमंडलों के साथ-साथ अध्ययन दौरों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, सेमिनारों और विदेश में आयोजित आधिकारिक बैठकों पर भी लागू होगी। अंतिम मंजूरी का अधिकार मुख्यमंत्री के पास ही रहेगा — मुख्य सचिव कार्यालय की भूमिका प्रारंभिक जांच की होगी, जिसके बाद पात्र प्रस्ताव अंतिम आदेशों के लिए मुख्यमंत्री के समक्ष रखे जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी खर्च में अनुशासन आएगा और विदेश दौरों की मंजूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनेगी।


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