केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि मई 2027 के बाद दर्ज होने वाले आपराधिक मामलों में तीन साल के भीतर न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। शुक्रवार को देहरादून की रिजर्व पुलिस लाइन में उत्तराखंड पुलिस के राष्ट्रपति पुलिस निशान (प्रेसिडेंट्स कलर) अलंकरण समारोह में शाह ने कहा कि अब तारीख पर तारीख नहीं मिलेगी — नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद एफआईआर से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का सफर तीन साल में पूरा होगा।
शाह ने कहा कि देश में 1 जुलाई 2024 से तीन नए आपराधिक कानून — भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम — लागू हो चुके हैं। इन कानूनों का मूल सिद्धांत सजा नहीं, न्याय है। उत्तराखंड में त्वरित न्याय के लिए फॉरेंसिक प्रयोगशाला स्थापित की गई है और बाकी व्यवस्थाएँ भी तैयार की जा रही हैं। शाह ने कहा कि पहले न्याय व्यवस्था तारीखों के लिए जानी जाती थी, लेकिन नए कानूनों से यह बदल रही है। जयपुर में पिछले साल उन्होंने बताया था कि राजस्थान में नए कानूनों के बाद सजा की दर 42 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई है।
गृह मंत्री ने उत्तराखंड को अगले तीन साल में नशामुक्त बनाने का लक्ष्य भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत क्षेत्रों के विकास और पलायन रोकने के लिए वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम चलाया जा रहा है। शाह ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने की यात्रा का पहला पड़ाव उत्तराखंड ही होगा। राज्य में नशे के खिलाफ अभियान को और तेज किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ी नशे से दूर रह सके।
गृह मंत्री ने कहा कि तीनों नए कानूनों ने पुराने भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है। इनमें जाँच के लिए समय-सीमा तय की गई है, फॉरेंसिक साक्ष्य को गंभीर अपराधों में जरूरी बनाया गया है और डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा दिया गया है। ई-एफआईआर और जीरो एफआईआर जैसी सुविधाओं से शिकायत दर्ज कराना भी आसान हुआ है। शाह ने कहा कि इन कानूनों का मकसद सजा देना नहीं, बल्कि पीड़ित को समय पर न्याय दिलाना है। इसी सोच के तहत उत्तराखंड में फॉरेंसिक प्रयोगशाला और अन्य व्यवस्थाएँ तैयार की जा रही हैं, ताकि जाँच में देरी न हो और दोषियों को तय समय में सजा मिल सके।
समारोह में शाह ने उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रपति निशान प्रदान किया — यह सम्मान पुलिस बल की सेवा और योगदान के लिए दिया जाता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी समारोह में मौजूद थे और उन्होंने इस सम्मान के लिए केंद्रीय गृह मंत्री का आभार जताया। गृह मंत्री के इस ऐलान से साफ है कि सरकार का जोर सिर्फ कानून बनाने पर नहीं, बल्कि उसे जमीन पर लागू करके आम आदमी तक समय पर न्याय पहुँचाने पर है। फॉरेंसिक जाँच, डिजिटल प्रक्रिया और तय समय-सीमा — तीनों मिलकर न्याय की रफ्तार बढ़ाएँगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अमित शाह ने न्याय को लेकर क्या ऐलान किया? — मई 2027 के बाद दर्ज मामलों में तीन साल के भीतर न्याय मिलेगा; एफआईआर से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर तीन साल में पूरा होगा।
यह कैसे संभव होगा? — तीन नए आपराधिक कानून (BNS, BNSS, BSA) 1 जुलाई 2024 से लागू हैं; फॉरेंसिक प्रयोगशाला और डिजिटल प्रक्रिया से जाँच तेज होगी।
उत्तराखंड को लेकर और क्या लक्ष्य रखा गया? — राज्य को अगले तीन साल में नशामुक्त बनाने का लक्ष्य; सीमांत गाँवों के लिए वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम जारी है।
उत्तराखंड में शाह की ₹1,475 करोड़ की परियोजनाओं की खबर पढ़ें — https://www.viksitharyana.com/amit-shah-uttarakhand-62-projects-1475-crore-dehradun-presidents-colour/

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