भारतीय रेल मंत्रालय कालका-शिमला हेरिटेज रूट पर हाइड्रोजन से चलने वाली टॉय ट्रेन चलाने की तैयारी कर रहा है। यह रूट हरियाणा के कालका से शुरू होकर हिमाचल प्रदेश के शिमला तक जाता है और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। रेलवे ने इस रूट का सर्वे पूरा कर लिया है और बड़ोग रेलवे स्टेशन पर हाइड्रोजन ईंधन प्लांट लगाने के लिए जगह चिन्हित कर ली है। यह पहल केंद्र सरकार के ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका मकसद चुनिंदा हेरिटेज रूटों पर स्वच्छ ईंधन वाली ट्रेनें चलाना है।
2023 में केंद्र सरकार ने इस कार्यक्रम के तहत देशभर में 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना घोषित की थी, जिनमें कालका-शिमला रूट भी शामिल था। इसके बाद रेलवे ने रूट का सर्वे किया और बड़ोग में प्लांट की जगह तय की। यह परियोजना 2024-25 की योजनाओं में शामिल की गई थी। अधिकारियों के अनुसार तकनीकी और प्रशासनिक औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद ट्रायल रन की उम्मीद है। ट्रेन की शुरुआत रेल मंत्रालय की मंजूरी, तकनीकी व्यवहार्यता और जरूरी प्रक्रियाएँ पूरी होने पर निर्भर करेगी।
हरियाणा के लिए यह खबर इसलिए भी खास है क्योंकि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जुलाई 2026 में हरियाणा के जींद-सोनीपत खंड पर ही चली थी। 89 किलोमीटर के इस खंड पर सफल परीक्षण के बाद अब हेरिटेज रूटों की बारी है। हाइड्रोजन ट्रेन में फ्यूल सेल तकनीक इस्तेमाल होती है, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बिजली बनती है और उप-उत्पाद के रूप में केवल पानी निकलता है। इससे पहाड़ी इलाकों में धुआँ और प्रदूषण नहीं फैलेगा और हेरिटेज रूट की प्राकृतिक सुंदरता बनी रहेगी।
कालका-शिमला रेल लाइन 1898 से 1903 के बीच बनी थी और जुलाई 2008 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। 96 किलोमीटर लंबी इस लाइन पर 103 सुरंगें और 900 से अधिक पुल हैं और यह 20 स्टेशनों से होकर गुजरती है। 120 साल से अधिक पुरानी इस लाइन पर हाइड्रोजन तकनीक के लिए विशेष इंजीनियरिंग समाधान की जरूरत होगी, क्योंकि पहाड़ी भू-भाग और संकरी पटरी की अपनी चुनौतियाँ हैं। 2024 में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर इस रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन की संभावना तलाशने का आग्रह किया था। बड़ोग में बनने वाला हाइड्रोजन प्लांट इस सेवा की रीढ़ होगा।

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