शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026 • हरियाणा 📱 WhatsApp Channel  |  मौसम  |  संपर्क
सरकारी योजनाएँ

मोदी कैबिनेट की 14500 करोड़ ऊर्जा भंडारण योजना: 92 GWh क्षमता से सस्ती और भरोसेमंद बिजली का रास्ता

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: मोदी कैबिनेट की 14500 करोड़ ऊर्जा भंडारण योजना: 92 GWh क्षमता से सस्ती और भरोसेमंद बिजली का रास्ता
  • तारीख़: 5 नवम्बर 2026, 7:50 पूर्वाह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: सरकारी योजनाएँ
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर को देश में ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए 14500 करोड़ रुपये की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण योजना को मंजूरी दे दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी और इसके तहत देशभर में 92 गीगावाट घंटे की नई ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर उपयोग हो सकेगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद इस योजना की जानकारी दी।

ऊर्जा भंडारण की जरूरत इसलिए बढ़ी है क्योंकि सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम और समय पर निर्भर करता है। दिन में जब धूप तेज होती है तो सौर बिजली प्रचुर मात्रा में बनती है, लेकिन शाम को मांग बढ़ने पर उत्पादन घट जाता है। भंडारण क्षमता इस अंतर को पाटती है — दिन की अतिरिक्त बिजली को संग्रहीत करके जरूरत के समय ग्रिड को वापस दी जा सकती है। इससे बिजली आपूर्ति अधिक भरोसेमंद बनती है और ग्रिड पर दबाव कम होता है। यही कारण है कि सरकार भंडारण को ऊर्जा परिवर्तन की रीढ़ मान रही है।

योजना के तहत 92 गीगावाट घंटे की क्षमता तीन हिस्सों में विकसित होगी। सबसे बड़ा हिस्सा 60 गीगावाट घंटे का हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं का होगा, जिनमें पानी को ऊंचाई पर संग्रहीत करके जरूरत पड़ने पर बिजली बनाई जाती है। दूसरा हिस्सा 30 गीगावाट घंटे का बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली का होगा, जो तेजी से बिजली दे सकती है और शहरी व औद्योगिक मांग को संभालने में उपयोगी है। शेष 2 गीगावाट घंटे उभरती हुई भंडारण तकनीकों के लिए रखे गए हैं, ताकि भविष्य की नई तकनीकों को भी बढ़ावा मिल सके।

इस योजना में कुल करीब 97600 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान लगाया गया है, जिसमें सरकार की 14500 करोड़ रुपये की सहायता परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने में मदद करेगी। यह नई क्षमता देश की मौजूदा ग्रिड-स्तरीय भंडारण क्षमता के लगभग 170 प्रतिशत के बराबर होगी। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की राष्ट्रीय विद्युत योजना के अनुसार देश को वित्त वर्ष 2031-32 तक कुल 411 गीगावाट घंटे की भंडारण क्षमता की जरूरत होगी, और यह योजना उस लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। साथ ही यह 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य में भी सहायक होगी।

क्षमता का आवंटन टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें बोली लगाने वाले अपनी दर के आधार पर चुने जाएंगे। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां इस वित्तपोषण सहायता की पात्र होंगी। बैटरी भंडारण परियोजनाओं के लिए कम से कम 40 प्रतिशत घरेलू सामग्री का उपयोग अनिवार्य किया गया है, ताकि भारत में बैटरी निर्माण को बढ़ावा मिले और आयात पर निर्भरता घटे। सरकार का मानना है कि इस योजना से उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे सस्ती और भरोसेमंद बिजली मिलने का रास्ता मजबूत होगा, उद्योगों को स्थिर आपूर्ति मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार को गति मिलेगी।


प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *