चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों (एसटीपी) के आसपास रहने वाले लोगों और किसानों को दुर्गंध से राहत देने की बड़ी तैयारी की है। प्रदेश के 24 एसटीपी पर एक्टिवेटेड कार्बन आधारित सिस्टम लगाए जाएंगे, जिससे उपचारित पानी की दुर्गंध कम होगी। इस योजना पर करीब ₹38.66 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा ने बुधवार को समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि उपचारित पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और किसानों की शिकायतों के समाधान को प्राथमिकता दी जाए।
एसटीपी के आसपास दुर्गंध की समस्या लंबे समय से आसपास के निवासियों और किसानों के लिए परेशानी का कारण रही है। उपचारित पानी जब खुले में छोड़ा जाता है या खेतों तक पहुंचता है, तो उसकी गंध से लोगों को दिक्कत होती है। एक्टिवेटेड कार्बन सिस्टम इस गंध को सोखने में मदद करता है, जिससे आसपास का वातावरण बेहतर होता है। इसके साथ ही उपचारित पानी की गुणवत्ता सुधरने से उसका पुनः उपयोग भी बढ़ेगा, यानी साफ किए गए पानी को सिंचाई और अन्य उपयोगी कामों में अधिक सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा।
समीक्षा बैठक में 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली प्रमुख परियोजनाओं की सर्किलवार समीक्षा भी की गई। अंबाला सर्किल में छछरौली, पिंजौर के माणकपुर और बराड़ा के मौजगढ़ रोड स्थित एसटीपी इस योजना में शामिल हैं। हिसार सर्किल में हिसार के ऋषि नगर, राजगढ़ रोड, कैमरी रोड और सातरोड, हांसी में लालपुरा रोड और भिवानी रोड, नारनौंद में हांसी-जींद रोड, जींद सर्किल में हांसी रोड, पुराना हांसी रोड और नरवाना रोड, जुलाना में सीएचसी के नजदीक तथा सफीदों के गांव रामपुरा स्थित एसटीपी शामिल हैं।
सिरसा सर्किल में फतेहाबाद के खराती खेड़ा रोड और भट्टू रोड तथा भूना में कुलां रोड स्थित एसटीपी को योजना में लिया गया है। भिवानी सर्किल में भिवानी के दादरी रोड और धाना रोड, सिवानी में तोशाम रोड तथा लोहारू में श्मशान घाट के नजदीक स्थित एसटीपी पर एक्टिवेटेड कार्बन सिस्टम के जरिए उपचारित पानी की दुर्गंध कम करने पर जोर रहेगा। इस तरह यह योजना प्रदेश के कई जिलों के शहरी और कस्बाई इलाकों तक पहुंचेगी, जहां एसटीपी के आसपास बड़ी आबादी रहती है।
मंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि एसटीपी से जुड़ी समस्या को गंभीरता से लिया जाए और उपचारित पानी की गुणवत्ता को लेकर कोई कोताही न बरती जाए। सरकार का मानना है कि सीवेज प्रबंधन में सुधार से शहरों की स्वच्छता बेहतर होगी, किसानों को राहत मिलेगी और उपचारित पानी के पुनः उपयोग से जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कदम हरियाणा के शहरी विकास और जनस्वास्थ्य की दिशा में एक सकारात्मक पहल है, जिसका सीधा लाभ एसटीपी के आसपास रहने वाले परिवारों और खेतों तक पहुंचेगा।
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