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राजस्थान गार्गी पुरस्कार योजना: 3.63 लाख बेटियों को ₹109 करोड़, बालिका प्रोत्साहन में ₹158 करोड़ की मदद

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: राजस्थान गार्गी पुरस्कार योजना: 3.63 लाख बेटियों को ₹109 करोड़, बालिका प्रोत्साहन में ₹158 करोड़ की मदद
  • तारीख़: 4 नवम्बर 2026, 9:33 अपराह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: ऑल इंडिया योजनाएं
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

जयपुर में 3 नवंबर को आयोजित प्रतिभा विकास शिविर में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बेटियों की शिक्षा के लिए बड़ी सौगातों का लेखा-जोखा रखा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने गार्गी पुरस्कार योजना के तहत 3.63 लाख बेटियों को कुल ₹109 करोड़ की सहायता दी है। इसके साथ ही कुल 66 लाख विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से ₹482 करोड़ की मदद पहुँचाई गई है। यह सहायता स्कूल यूनिफॉर्म, बैग और बेटियों को प्रोत्साहन राशि के रूप में दी गई है, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक कमी के कारण पढ़ाई से दूर न रहे।

बेटियों की शिक्षा इस पूरी पहल के केंद्र में रही। मुख्यमंत्री ने बताया कि बालिका प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के तहत तीन लाख से अधिक बेटियों को ₹158 करोड़ दिए गए हैं। सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के सभी विद्यार्थियों और कक्षा नौ से बारह तक की छात्राओं को यूनिफॉर्म व स्कूल बैग के लिए ₹800 प्रति विद्यार्थी की सहायता दी जा रही है। इसके अलावा चार हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें लगाई गई हैं, ताकि छात्राओं को स्कूल में किसी तरह की असुविधा न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियाँ समाज और राष्ट्र की शक्ति हैं, और शिक्षित बेटी पूरे परिवार व समाज की प्रगति का आधार बनती है।

राज्य सरकार ने स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं पर भी बड़ा काम किया है। कक्षा एक से आठ तक के करीब 41.56 लाख विद्यार्थियों को मुफ्त यूनिफॉर्म के लिए लगभग ₹250 करोड़ दिए गए हैं। चार हजार से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए गए हैं और 500 पीएम श्री स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गई है। पिछले दो शैक्षणिक सत्रों में आठ करोड़ से अधिक पाठ्यपुस्तकें, 14 लाख साइकिलें और 88 हजार टैबलेट विद्यार्थियों को दिए गए हैं। शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत 4.41 लाख विद्यार्थियों को मुफ्त प्रवेश भी मिला है, जिससे वंचित परिवारों के बच्चे भी अच्छी शिक्षा से जुड़ सके हैं।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी राजस्थान सरकार ने ठोस आँकड़े रखे हैं। राजीविका के माध्यम से 25 लाख महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 20 लाख से अधिक महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने शिविर में मौजूद छात्राओं से आग्रह किया कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ स्वयं लें और कम से कम दस अन्य महिलाओं को भी इन योजनाओं से जोड़ें। पीएम पोषण के तहत श्रीकृष्ण भोग पहल के जरिए दानदाता, जनप्रतिनिधि और शिक्षक विशेष अवसरों पर स्कूली बच्चों के लिए भोजन प्रायोजित कर सकते हैं। राजस्थान राज्य ओपन स्कूल के माध्यम से ऑन-डिमांड परीक्षा की सुविधा भी शुरू की गई है, ताकि वंचित समुदायों और श्रमिक परिवारों के बच्चे पढ़ाई से जुड़े रहें।

कुल मिलाकर राजस्थान सरकार का यह शिक्षा पैकेज बेटियों की पढ़ाई, स्कूलों की सुविधाओं और महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को एक साथ आगे बढ़ाता है। गार्गी पुरस्कार और बालिका प्रोत्साहन जैसी योजनाएँ मेधावी छात्राओं को सम्मान और आर्थिक सहारा देती हैं, जबकि यूनिफॉर्म सहायता व डिजिटल सुविधाएँ हर बच्चे तक बुनियादी जरूरतें पहुँचाती हैं। केंद्र सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के साथ मिलकर ये प्रयास बेटियों की शिक्षा के प्रति समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। अभिभावकों को सलाह है कि वे अपने बच्चों के लिए इन योजनाओं की पात्रता और आवेदन की जानकारी अपने नजदीकी सरकारी स्कूल या शिक्षा विभाग के कार्यालय से अवश्य जाँच लें।


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