हरियाणा सरकार ने जमीन मालिकों और विकासकर्ताओं के लिए ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स यानी TDR नीति में महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में 3 नवंबर को चंडीगढ़ में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में रखे गए सभी सात एजेंडों को मंजूरी मिली, जिनमें 16 नवंबर 2021 को अधिसूचित TDR नीति में बदलाव भी शामिल है। इस संशोधन से TDR प्रमाणपत्रों के मूल्यांकन की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी और उनका इस्तेमाल पहले से कहीं अधिक योजनाओं में किया जा सकेगा।
संशोधन के तहत अब TDR प्रमाणपत्र के मूल्यांकन की गणना का फार्मूला बदल दिया गया है। अब भूमि का मूल्यांकन आवेदन जमा करने की तिथि पर लागू औसत कलेक्टर दर के आधार पर किया जाएगा। इसी तरह जिस स्थान पर TDR का उपयोग किया जाना है, उस भूमि का मूल्यांकन भी आवेदन जमा करने की तिथि पर लागू औसत कलेक्टर दर से ही होगा। इससे मूल्यांकन में एकरूपता आएगी और जमीन मालिकों को पहले की तुलना में स्पष्ट और तय मानदंड के आधार पर लाभ मिलेगा।
संशोधित फार्मूला उन सभी लंबित आवेदनों पर भी लागू होगा, जिनमें TDR उपयोग प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति अभी तक नहीं दी गई है और उपयोग के लिए सैद्धांतिक मंजूरी भी प्रदान नहीं की गई है। यानी जिन मामलों में प्रक्रिया अधूरी पड़ी थी, उन्हें भी नए और सरल फार्मूले का लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे पुराने अटके हुए मामलों का निपटारा तेजी से होगा और विकास कार्यों में गति आएगी।
इसके साथ ही TDR प्रमाणपत्रों के उपयोग का दायरा भी बढ़ाया गया है। पहले इन प्रमाणपत्रों का उपयोग उसी डेवलपमेंट प्लान तक सीमित था, जिससे वे जुड़े थे। अब इनका उपयोग प्रदेश की किसी भी कम संभावित विकास योजना में भी किया जा सकेगा। इससे उन क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा मिलेगा, जहां अब तक विकास की गति धीमी रही है, और जमीन मालिकों के प्रमाणपत्र बेकार नहीं पड़े रहेंगे।
मंत्रिमंडल की इसी बैठक में 26 नवंबर को संविधान दिवस पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने, नई लैंड पूलिंग पॉलिसी-2026 और ट्रैवल एजेंट पंजीकरण नियम-2026 को भी मंजूरी दी गई थी। TDR नीति में यह बदलाव सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें जमीन मालिकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ प्रदेश के संतुलित विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। जिन लोगों के पास TDR प्रमाणपत्र हैं या जो विकास योजनाओं से जुड़े हैं, उन्हें नए नियमों की जानकारी के लिए संबंधित विभाग से संपर्क करना चाहिए।

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