चंडीगढ़। भारतीय जनता पार्टी आज बुधवार 4 नवंबर को चंडीगढ़ में ‘जख्म 84 के’ नाम से एक दिवसीय कॉन्क्लेव आयोजित कर रही है। यह कॉन्क्लेव सेक्टर 24 स्थित होटल पार्कव्यू में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। इसका उद्देश्य 1984 के सिख विरोधी दंगों के सच, पीड़ित परिवारों के दशकों लंबे इंसाफ के संघर्ष और उनके पुनर्वास के प्रयासों को 1984 के बाद जन्मी नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। कॉन्क्लेव के अंतिम और पांचवें सत्र में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शिरकत करेंगे और भाजपा सरकारों द्वारा पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए किए गए कार्यों के बारे में बताएंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह साढ़े 9 बजे एक विशेष फोटो प्रदर्शनी से होगी, जिसमें 1984 की घटनाओं से जुड़ी तस्वीरें और दस्तावेज प्रदर्शित किए जाएंगे। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और प्रदेश प्रभारी सतीश पूनिया संयुक्त रूप से करेंगे। इसके बाद उद्घाटन सत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद रवि शंकर प्रसाद मुख्य वक्ता होंगे। प्रसाद सज्जन कुमार मामले में पीड़ितों की ओर से उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में पैरवी कर चुके हैं।
कॉन्क्लेव में उद्घाटन सत्र के अलावा पांच विशेष सत्र होंगे। पहले सत्र ‘नरसंहार कब और कैसे हुआ’ में 1984 के पीड़ित अपनी आपबीती साझा करेंगे, जिनमें निरप्रीत कौर भी शामिल हैं, जो सज्जन कुमार को सजा दिलाने वाले मामले की प्रमुख गवाह रही हैं। दूसरे सत्र ‘क्या नरसंहार एक साजिश थी?’ में वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का, पूर्व अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष तरलोचन सिंह और भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह अपने विचार रखेंगे। तीसरे सत्र ‘इंसाफ का कत्ल’ में जांच में हुई कथित खामियों और सबूतों से जुड़े सवालों पर चर्चा होगी, जिसमें उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल का नेतृत्व कर चुके न्यायमूर्ति एसएन ढींगरा (सेवानिवृत्त) भी शामिल होंगे।
चौथे सत्र ‘दोषियों को सजा – भाजपा के प्रयास’ में दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और एचएस फुल्का बताएंगे कि पीड़ितों को बचाने से लेकर दोषियों को सजा दिलाने तक भाजपा ने क्या प्रयास किए। अंतिम सत्र पीड़ित परिवारों के पुनर्वास और कल्याण पर केंद्रित होगा, जिसमें मुख्यमंत्री सैनी के साथ सतीश पूनिया, केवल सिंह ढिल्लों और सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी भी शामिल होंगे। साहनी ने स्वयं 1984 की हिंसा में अपने परिवार के पांच सदस्य खोए थे। पूरे कॉन्क्लेव का संचालन भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह करेंगे।
भाजपा का कहना है कि 42 साल बाद भी इस त्रासदी का सच नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि वह इतिहास के इस अध्याय को समझ सके और पीड़ित परिवारों के इंसाफ की लड़ाई से सीख ले सके। कॉन्क्लेव में दिल्ली और पंजाब के दंगा पीड़ित परिवारों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री का अंतिम सत्र में शामिल होना इसलिए भी अहम है, क्योंकि पुनर्वास का मुद्दा पीड़ित परिवारों के लिए आज भी जीवंत है और भाजपा सरकारों ने इस दिशा में उठाए गए कदमों को सामने रखने का मंच इस कॉन्क्लेव को माना जा रहा है।

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