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हरियाणा आबादी देह कानून 2025: गांव के घर का मिलेगा मालिकाना हक, रिकॉर्ड पर आपत्ति के लिए 90 दिन

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: हरियाणा आबादी देह कानून 2025: गांव के घर का मिलेगा मालिकाना हक, रिकॉर्ड पर आपत्ति के लिए 90 दिन
  • तारीख़: 3 नवम्बर 2026, 5:07 अपराह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: विकास
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

हरियाणा के गांवों में पीढ़ियों से अपने मकानों पर काबिज परिवारों के लिए बड़ी खबर है। हरियाणा आबादी देह अधिनियम 2025 के तहत गांवों की आबादी देह में रहने वाले पात्र कब्जाधारियों के अधिकारों को निर्धारित प्रक्रिया से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। अंतिम रिकॉर्ड में नाम आने के बाद संबंधित व्यक्ति को स्वामित्व प्रमाणपत्र जारी करने का प्रावधान है। यह व्यवस्था इसलिए अहम है, क्योंकि गांवों की आबादी देह में कई परिवार लंबे समय से मकानों, आंगन और दुकानों पर काबिज हैं, लेकिन उनके अधिकारों के समर्थन में स्पष्ट और अद्यतन अभिलेख उपलब्ध नहीं रहे हैं। अब कानून के जरिए इस कमी को दूर किया जा रहा है।

इस अधिनियम को 19 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था और इसमें 26 नवंबर 2025 से लागू होने का प्रावधान है। कानून का उद्देश्य आबादी देह में पात्र व्यक्ति के अधिकारों की पहचान करना, उनका रिकॉर्ड तैयार करना और सीमाओं से जुड़े विवादों को सुलझाना है। इसके लिए सर्वेक्षण, नक्शे और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति की पहचान की जाती है। इसके बाद सक्षम राजस्व अधिकारी प्रस्तावित रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वेक्षण से तैयार मैपिंग भी अहम आधार बनती है, जिससे हर सर्वे इकाई की सीमा, क्षेत्रफल और उस पर बने निर्माण का सटीक रिकॉर्ड तैयार होता है।

कानून में एक बात साफ की गई है कि केवल लंबे समय से कब्जा होने का दावा करना अपने आप में हर परिस्थिति में मालिकाना हक का अंतिम प्रमाण नहीं है। यह देखना जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति की स्थिति कानून में तय पात्रता के अनुरूप है या नहीं। किरायेदार, पट्टेदार, बंधकधारी और अस्थायी कब्जे वाले व्यक्ति को केवल इसी आधार पर मालिक नहीं माना जाता। अंतिम प्रविष्टि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही की जाती है। साथ ही गांव की साझा जमीन की स्थिति भी अलग रखी गई है। सड़क, रास्ते, सार्वजनिक पार्क, तालाब, खेल मैदान और समुदाय के उपयोग वाले स्थान साझा क्षेत्र की श्रेणी में आ सकते हैं, और पंचायत में निहित साझा जमीन केवल किसी व्यक्ति के कब्जे के आधार पर उसकी निजी संपत्ति नहीं बन जाती।

प्रस्तावित रिकॉर्ड और नक्शे को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की व्यवस्था है, ताकि प्रभावित लोग संपत्ति की सीमा, क्षेत्रफल या स्वामित्व संबंधी प्रविष्टि की जांच कर सकें। अधिनियम की धारा 12 के अनुसार रिकॉर्ड प्रदर्शित होने के बाद सामान्यतः 90 दिन के भीतर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है, और पर्याप्त कारण होने पर अधिकारी समयसीमा के बाद आई आपत्ति पर भी विचार कर सकता है। आपत्ति मिलने पर संबंधित पक्षों को सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद निर्णय दिया जाता है। असंतुष्ट पक्ष के लिए अपील, समीक्षा और पुनरीक्षण के रास्ते भी तय हैं। धारा 14 के तहत संबंधित आदेश के विरुद्ध सामान्यतः 30 दिन के भीतर अपील की जा सकती है, जबकि समीक्षा के लिए 60 दिन और आयुक्त के समक्ष पुनरीक्षण के लिए 60 दिन की अवधि निर्धारित है।

नियमों के तहत सहायक कलेक्टर द्वितीय श्रेणी के सर्वे अधिकारी गांव में आम सभा में सर्वेक्षण की प्रक्रिया समझाते हैं, और तहसीलदार व नायब तहसीलदार भी सहायक कलेक्टर द्वितीय श्रेणी की शक्तियों का प्रयोग करते हैं। अंतिम रिकॉर्ड के आधार पर स्वामित्व अधिकार प्रमाणपत्र, संपत्ति पहचान अधिकार प्रमाणपत्र या स्वामित्व विलेख जारी किया जाता है। ग्रामीण परिवारों के लिए जरूरी है कि वे अपने मकान और भूखंड का विवरण, उपलब्ध दस्तावेज, हिस्सेदारी और सीमाओं की जांच करें और रिकॉर्ड में गलती मिलने पर निर्धारित समय में आपत्ति दर्ज कराएं। सही अभिलेख भविष्य के विवाद कम करेगा।


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