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हरियाणा की छात्राओं को मिलेंगे 11 लाख से ज्यादा सैनिटरी पैड, स्कूल स्तर पर होगी डिलीवरी

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  • खबर: हरियाणा की छात्राओं को मिलेंगे 11 लाख से ज्यादा सैनिटरी पैड, स्कूल स्तर पर होगी डिलीवरी
  • तारीख़: 3 नवम्बर 2026, 11:51 पूर्वाह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: शिक्षा
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

हरियाणा सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली किशोरियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने 9वीं से 12वीं कक्षा की छात्राओं के लिए दिसंबर 2026 तक 11 लाख 04 हजार 813 सैनिटरी नैपकिन पैकेट की आपूर्ति का आदेश जारी कर दिया है। इस बार पैकेट सीधे स्कूल स्तर पर पहुंचाए जाएंगे, ताकि किसी भी छात्रा को इस सुविधा के लिए भटकना न पड़े और वितरण में कोई देरी न हो।

आदेश के अनुसार एक पैकेट में 10 पैड होंगे और प्रति पैक की दर सभी करों सहित 20 रुपये 50 पैसे तय की गई है। कुल आपूर्ति दो कंपनियों के बीच बांटी गई है। केरल की एम/एस एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को 8 लाख 14 हजार 308 पैकेट की आपूर्ति का जिम्मा मिला है, जबकि हरियाणा के बहादुरगढ़ की एम/एस नुवो मेडसर्ज प्राइवेट लिमिटेड 2 लाख 90 हजार 505 पैकेट पहुंचाएगी। इस तरह हर महीने कुल 3 लाख 68 हजार 271 पैकेट छात्राओं तक पहुंचेंगे। आपूर्ति की दरें पंचकूला स्थित आपूर्ति एवं निपटान विभाग की ओर से तय दरों के आधार पर तय की गई हैं।

निदेशालय ने जिलेवार मांग भी जारी की है, जिससे यह साफ है कि यह योजना पूरे प्रदेश में एक साथ लागू होगी। गुरुग्राम जिले में सबसे ज्यादा 83 हजार 286 पैकेट की जरूरत बताई गई है। इसके बाद सिरसा में 70 हजार 059, फरीदाबाद में 68 हजार 919, करनाल में 64 हजार 068, जींद में 59 हजार 553, कैथल में 59 हजार 313, फतेहाबाद में 56 हजार 046, सोनीपत में 54 हजार 759 और हिसार में 54 हजार 450 पैकेट की मांग है। मेवात, पानीपत, भिवानी, पलवल, रोहतक, रेवाड़ी, झज्जर, महेंद्रगढ़, हांसी और चरखी दादरी के साथ-साथ अंबाला, कुरुक्षेत्र, पंचकूला और यमुनानगर की मांग भी सूची में शामिल है।

वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता पर खास जोर दिया गया है। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि डिलीवरी का स्थान स्कूल ही होगा और स्कूलवार जरूरत की सूची भी आदेश के साथ लगाई गई है। कंपनियों को भुगतान से पहले डिलीवरी चालान संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी से सत्यापित करवाना अनिवार्य होगा। यह शर्त इसलिए रखी गई है ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो और पैड सीधे छात्राओं तक पहुंचें। इस आदेश की प्रति शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजी गई है।

यह योजना बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की भावना को जमीन पर उतारने की दिशा में एक अहम कदम है। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में छात्राएं इस सुविधा के अभाव में स्कूल से दूर हो जाती हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। स्कूल में ही निशुल्क पैड मिलने से उनकी उपस्थिति बढ़ेगी और स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। इससे पहले भी प्रदेश में सरकारी स्कूलों की छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने के चरण चल चुके हैं, जिनमें हर छात्रा को हर महीने पैड देने और स्कूलों से मासिक रिपोर्ट लेने की व्यवस्था रही है। नई आपूर्ति उसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए दिसंबर 2026 तक छात्राओं की जरूरत पूरी करेगी।


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