हरियाणा: रेवाड़ी एम्स में दिसंबर तक शुरू होगी OPD, एमबीबीएस कक्षाएं शुरू — 1700 करोड़ की परियोजना 68% पूरी
रेवाड़ी के गांव माजरा में बन रहे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से दक्षिण हरियाणा के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। यहां एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं और दिसंबर के अंत तक अस्पताल की ओपीडी सेवाएं भी शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। ओपीडी शुरू होने के बाद रेवाड़ी सहित आसपास के जिलों के मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली या दूर के बड़े शहरों तक जाने की मजबूरी से राहत मिलेगी। करीब 1700 करोड़ रुपये की लागत से 210 एकड़ भूमि पर विकसित हो रहे इस संस्थान का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार अब तक करीब 68 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है। परिसर में मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, सुपर स्पेशियलिटी विभाग, आईसीयू और आपातकालीन सेवाओं सहित एक बड़ा आधुनिक अस्पताल तैयार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2024 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया था और जमीन हरियाणा सरकार ने उपलब्ध कराई थी। एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए पहले चरण में 50 सीटों को मंजूरी मिली है। रिपोर्टों के अनुसार इनमें से 48 विद्यार्थियों ने पहले ही पढ़ाई शुरू कर दी है, जबकि शेष सीटों पर भी जल्द विद्यार्थियों के जुड़ने की संभावना है। पहले स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने नवंबर 2026 से ओपीडी शुरू करने की तैयारी की बात कही थी, वहीं ताजा रिपोर्टों के अनुसार दिसंबर के अंत तक ओपीडी शुरू होने की प्रबल संभावना है। संस्थान प्रबंधन ओपीडी की तैयारियों में जुटा है और पूरी तरह संचालित होने पर यहां प्रतिदिन करीब 1500 मरीजों की ओपीडी का लक्ष्य रखा गया है। इस एम्स का लाभ केवल रेवाड़ी तक सीमित नहीं रहेगा। गुरुग्राम, भिवानी, महेंद्रगढ़ और झज्जर के साथ-साथ राजस्थान के नीमराना, अलवर, झुंझुनू और कोटपूतली क्षेत्र के लोगों को भी यहां विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। एम्स तक पहुंच आसान बनाने के लिए रेवाड़ी-जैसलमेर हाईवे से जुड़े ओवरब्रिज सहित क्षेत्र के अन्य विकास कार्यों के लिए हरियाणा सरकार ने 330 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। रेलवे लाइन पर ओवरब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को एम्स तक पहुंचने में आसानी होगी। दक्षिण हरियाणा के लिए यह संस्थान स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा और क्षेत्र में ही आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
