UP: योगी सरकार ने शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को दिया कैशलेस इलाज का तोहफा, शासनादेश जारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शिक्षा विभाग के लाखों शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा का शासनादेश जारी कर दिया गया है। अब ये कर्मचारी सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ साचीज से जुड़े निजी अस्पतालों में भी भर्ती होकर बिना पैसे दिए इलाज करा सकेंगे। इलाज की दरें आयुष्मान भारत योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मानकों के अनुसार होंगी।
इस सुविधा का लाभ बेसिक शिक्षा परिषद, सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल, वित्तविहीन विद्यालयों, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों, संस्कृत विद्यालयों और संस्कृत महाविद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को मिलेगा। समग्र शिक्षा परियोजना में काम करने वाले संविदा, सेवा प्रदाता और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी भी इसके दायरे में आएंगे। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी यह सुविधा दी गई है। कर्मचारियों के साथ उनके आश्रित परिजनों को भी कैशलेस इलाज मिलेगा।
संख्या की बात करें तो बेसिक शिक्षा विभाग के तहत करीब 1,22,304 कर्मचारियों और माध्यमिक शिक्षा विभाग के तहत 48,062 कर्मचारियों को इस योजना में शामिल किया गया है। इस तरह कुल 1.70 लाख से अधिक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलेगा। सरकार ने प्रति कर्मचारी सालाना करीब 3,000 रुपये का प्रीमियम तय किया है, जिसका पूरा खर्च सरकार खुद वहन करेगी। बेसिक शिक्षा विभाग के लिए सालाना करीब 36.69 करोड़ रुपये और माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए करीब 14.42 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है।
योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज यानी साचीज के माध्यम से होगा। नोडल अधिकारी हर साल 30 जून तक पात्र कर्मचारियों की सूची साचीज को उपलब्ध कराएंगे, ताकि लाभार्थियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने दोनों विभागों के लिए अलग-अलग आदेश जारी किए हैं।
गौरतलब है कि योगी कैबिनेट ने 27 अक्टूबर की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसके बाद अब शासनादेश जारी होने से सुविधा लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। माध्यमिक शिक्षा के शिक्षकों को फरवरी से ही कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिल रही थी, अब शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी वही सुरक्षा मिलेगी। हालांकि जो कर्मचारी पहले से आयुष्मान भारत या मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ ले रहे हैं, उन्हें इस योजना के तहत दोबारा लाभ नहीं मिलेगा।
