हरियाणा: अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2026 की तैयारी तेज, CM सैनी ने कुरुक्षेत्र में धार्मिक-सामाजिक संगठनों से की चर्चा
कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2026 की तैयारियाँ तेज हो गई हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुवार 29 अक्टूबर को कुरुक्षेत्र स्थित गीता ज्ञान संस्थानम में धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और महोत्सव के आयोजन को लेकर उनके सुझाव और विचार सुने। मुख्यमंत्री ने सभी संगठनों से मिलकर महोत्सव को भव्य, गरिमामय और जनभागीदारी से भरपूर बनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला संदेश है। उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी जी गीता को जीवन के संघर्षों में मार्गदर्शन और सांत्वना का स्रोत मानते थे। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गीता के कर्मयोग के संदेश पर विशेष जोर दिया था, जबकि श्री अरविंद का मानना था कि गीता का संदेश जीवन से विमुख होना नहीं, बल्कि कर्म और आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से जीवन को बेहतर दिशा देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के माध्यम से गीता के इसी संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा और महोत्सव की हर गतिविधि के केंद्र में गीता का संदेश रहेगा।
बैठक में मुख्यमंत्री ने ‘स्वच्छ कुरुक्षेत्र, पवित्र कुरुक्षेत्र’ को सामूहिक संकल्प बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गीता की धरती की पवित्रता के अनुरूप कुरुक्षेत्र का वातावरण स्वच्छ, सुंदर और सुव्यवस्थित रहना चाहिए। मंदिरों, आश्रमों, धर्मशालाओं, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए और प्लास्टिक मुक्त वातावरण बनाने में सभी सहयोग करें। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का ‘अतिथि देवो भव’ की भावना से स्वागत किया जाए, ताकि हर आगंतुक को कुरुक्षेत्र में अपनापन और सम्मान का अनुभव हो।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कुरुक्षेत्र के सभी प्रमुख चौराहों को महाभारतकालीन थीम पर विकसित किया जाएगा, जिससे शहर के अलग-अलग हिस्सों में कुरुक्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान झलकेगी। उनका कहना था कि पूरा कुरुक्षेत्र शहर ही गीता और भगवान श्रीकृष्ण के शहर की भावना को प्रतिबिंबित करे। उन्होंने धार्मिक और सामाजिक संगठनों से अपने-अपने स्तर पर महोत्सव की तैयारियों में योगदान देने और प्रशासन को सुझाव देने का आग्रह किया, क्योंकि संगठनों और नागरिकों की भागीदारी से ही महोत्सव को व्यापक जन-उत्सव का स्वरूप मिल सकता है।
इस अवसर पर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने सभी धार्मिक और सामाजिक संगठनों से सौहार्द की भावना के साथ अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे तीर्थस्थल कुरुक्षेत्र और हम सभी का गौरव बढ़ेगा। उन्होंने ‘गीता के लिए 18 मिनट’ पहल से जुड़ने का भी आग्रह किया और कहा कि गीता का संदेश तभी सार्थक होगा जब उसकी शिक्षाएँ हमारे आचरण में भी झलकें। बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता, पूर्व राज्य मंत्री सुभाष सुधा, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती, आध्यात्मिक नेता और कुरुक्षेत्र के विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की बैठक में भी महोत्सव की तैयारियों की रूपरेखा और व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई।
कुरुक्षेत्र को गीता की धरती के रूप में जाना जाता है और अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव हरियाणा का प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन है, जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु, विद्वान और राजनयिक शामिल होते हैं। राज्य सरकार इस महोत्सव के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत और गीता के शाश्वत संदेश को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करती है।
