मन की बात 139: पीएम मोदी ने कहा वोकल फॉर लोकल भारतीय उत्पादों को पहुंचा रहा दुनिया के बाजारों तक — पंचकूला में सैनी ने सुना कार्यक्रम
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात की 139वीं कड़ी को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों के प्रति बढ़ता रुझान देश के किसानों ग्रामीण कारीगरों और जनजातीय समुदायों के लिए दुनिया के नए बाजार खोल रहा है। उन्होंने दिवाली और छठ के त्योहारों के दौरान स्थानीय रूप से बने उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की, ताकि आत्मनिर्भर भारत का संकल्प और तेज हो सके।
प्रधानमंत्री ने इसके उदाहरण भी गिनाए। उन्होंने बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस तक पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव जा रही है। इसका अर्थ है कि भारतीय किसानों के लिए दुनिया में नए बाजार खुल रहे हैं। महाराष्ट्र के जनजातीय समुदायों की ‘शबरी नेचुरल्स’ पहल का भी जिक्र हुआ, जिसमें शहद महुआ चिर और बांस से बने उत्पादों पर जनजातीय कला की छाप वाली पैकेजिंग की गई है — इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित गुड डिजाइन पुरस्कार मिला है।
खादी और हस्तशिल्प के पुनरुत्थान पर प्रधानमंत्री ने बताया कि गांधी जयंती के दिन एक ही दिन में खादी उत्पादों की बिक्री 28 करोड़ रुपये से अधिक रही। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की खरीदारी ही कारीगरों को प्रोत्साहन देती है। पंजाब के मालवा क्षेत्र में ‘नव-त्रिंजन’ पहल के तहत रसायन-मुक्त कपास की खेती, उत्तराखंड में हेवाल नदी के पुनरुद्धार के प्रयास, मेघालय के खंडूली गांव में बाजरा आधारित उत्पादों से किसानों की आय बढ़ने और पूर्वोत्तर में बाजरा की खेती के पुनरुत्थान की कहानियां भी कार्यक्रम में साझा की गईं।
प्रधानमंत्री ने मन की बात की 12 वर्ष की यात्रा को याद करते हुए कहा कि विजयादशमी के दिन 12 वर्ष पहले शुरू हुआ यह कार्यक्रम उनके लिए किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है — देश के सामान्य लोगों के परिश्रम साहस और सेवा भावना को समझने और सम्मान देने की यात्रा। कार्यक्रम में टिकाऊ खेती अंगदान और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं जैसे विषयों पर भी बात हुई।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंचकूला में लोगों के साथ बैठकर कार्यक्रम सुना। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में लोगों के जीवन से सीधे जुड़े विषयों — टिकाऊ खेती स्वास्थ्य सुविधाओं और सामाजिक जिम्मेदारी — पर ध्यान दिलाया गया। स्वदेशी उत्पादों खादी और स्थानीय कारीगरों पर जोर आत्मनिर्भरता और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने वाला संदेश है।
