हरियाणा बिजली विवाद: 5-6 दिन में APTEL में अपील, स्टे मांगेगी सरकार — अनिल विज बोले ‘कर्मचारियों के साथ हैं, जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट जाएंगे’
हरियाणा सरकार ने बिजली निजीकरण के मुद्दे पर बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के उस आदेश को प्रदेश सरकार अगले 5 से 6 दिनों में अपीलीय ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) में चुनौती देगी, जिसमें निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस की मंजूरी दी गई है। सरकार ट्रिब्यूनल से इस आदेश पर स्टे की भी मांग करेगी।
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने साफ कहा है कि सरकार बिजली कर्मचारियों के साथ खड़ी है। उनका कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो सरकार इस लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगी। विज के मुताबिक यह फैसला उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए उठाया जा रहा कदम है, क्योंकि लाइसेंस का आवेदन ऊर्जा विभाग के माध्यम से नहीं, बल्कि सीधे HERC को दिया गया था और सरकार ने आयोग के समक्ष इस प्रस्ताव का हर बिंदु पर विरोध दर्ज कराया था।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी इस मामले में कर्मचारियों को पूरा समर्थन दिया है। प्रशासनिक सचिवों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के हितों की रक्षा का आश्वासन दिया और यूनियनों से प्रस्तावित हड़ताल वापस लेने की अपील की। सरकार का मानना है कि त्योहारी सीजन में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना जरूरी है और किसी भी तरह का व्यवधान जनता के लिए परेशानी बनेगा।
हालांकि कर्मचारी संगठनों के संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सरकार के आश्वासन के बावजूद हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है। 22 से 24 अक्टूबर तक प्रस्तावित हड़ताल अभी भी बनी हुई है। सरकार की ओर से यूनियनों से बातचीत जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही कोई समाधान निकलेगा।
गौरतलब है कि HERC के आदेश के तहत इलेवन पावर को गुरुग्राम और नूंह में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के साथ समानांतर बिजली वितरण का अधिकार मिला है। कंपनी ने पांच साल में करीब 4,717 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है और 2027-28 से आपूर्ति शुरू करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन सैनी सरकार का रुख है कि प्रदेश के कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
