केंद्र सरकार की Market Development Assistance (MDA) योजना जैविक खाद को बढ़ावा देने के लिए है। इसके तहत बायोगैस और Compressed Bio-Gas (CBG) प्लांटों में बनी जैविक खाद की बिक्री पर ₹1,500 प्रति मीट्रिक टन की सहायता दी जाती है। यह मदद किसानों को सीधे नहीं मिलती — यह CBG/बायोगैस प्लांटों और उर्वरक विपणन कंपनियों को मिलती है, ताकि जैविक खाद सस्ती और आसानी से उपलब्ध हो सके। योजना GOBARdhan पहल से जुड़ी है, जो 2018 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शुरू हुई थी।
₹1,500 प्रति टन किसे मिलता है
सहायता सिर्फ तीन तरह की जैविक खाद पर मिलती है — Fermented Organic Manure (FOM), Liquid Fermented Organic Manure (LFOM) और Phosphate Rich Organic Manure (PROM)। ये खाद GOBARdhan पहल के तहत चलने वाले बायोगैस/CBG प्लांटों में बनती है। प्लांटों को Integrated Fertilizer Management System (iFMS) पोर्टल पर पंजीकरण कराना होता है — 23 मार्च 2026 तक 133 प्लांट पंजीकृत थे। उर्वरक कंपनियों और CBG ऑपरेटरों के बीच 44 समझौते (MoU) भी हुए हैं।
अब क्या स्थिति है — एक बड़ा बदलाव
पहले यह योजना उर्वरक विभाग (Department of Fertilizers) चलाता था, जिसका प्रावधान वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक था (कुल ₹1,451.84 करोड़)। 6 अगस्त 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने GOBARdhan को राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना (National Circular Bioenergy Scheme) के रूप में मंज़ूरी दी — कुल प्रावधान ₹23,731 करोड़, वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक। इसमें SATAT, MDA और अन्य घटक एक ही ढाँचे में आ गए हैं, और नोडल मंत्रालय अब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय है। ₹1,500 प्रति टन की दर उर्वरक विभाग की MDA योजना की है; एकीकृत योजना के तहत दर पर अलग से कोई नई अधिसूचना अभी सामने नहीं आई है।
कितनी मदद अब तक दी गई
शुरुआत से अब तक ₹202.17 करोड़ की MDA सहायता जारी की जा चुकी है (15 जुलाई 2026 तक), जिससे 36.43 लाख मीट्रिक टन FOM/LFOM/PROM की बिक्री हुई है। यह आँकड़ा बताता है कि जैविक खाद का बाज़ार धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
किसान के लिए इसका क्या मतलब है
किसान को इस योजना के लिए कोई आवेदन नहीं करना है — न कोई फॉर्म है, न कोई सीधी सब्सिडी। फायदा यह है कि प्लांटों को मिलने वाली सहायता से जैविक खाद की आपूर्ति बढ़ती है। खाद की उपलब्धता अपने उर्वरक विक्रेता या कृषि विभाग से पूछें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: MDA योजना में ₹1,500 प्रति टन किसे मिलता है?
उत्तर: CBG/बायोगैस प्लांटों और उर्वरक विपणन कंपनियों को — FOM, LFOM और PROM की बिक्री पर। किसानों को यह राशि सीधे नहीं मिलती।
प्रश्न 2: GOBARdhan से इसका क्या संबंध है?
उत्तर: MDA उन्हीं प्लांटों की जैविक खाद पर लागू होती है जो GOBARdhan पहल के तहत चलते हैं। अब यह पूरी व्यवस्था एकीकृत GOBARdhan योजना का हिस्सा है।
प्रश्न 3: किसान इस योजना का लाभ कैसे ले?
उत्तर: किसान को आवेदन नहीं करना है। लाभ जैविक खाद की बेहतर उपलब्धता के रूप में मिलता है — खाद की जानकारी अपने कृषि विभाग से लें।
प्रश्न 4: यह योजना अभी चल रही है?
उत्तर: हाँ — 6 अगस्त 2026 से यह एकीकृत GOBARdhan राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना के तहत चल रही है, जिसका नोडल मंत्रालय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय है।
उपयोगी लिंक
- PIB — GOBARdhan राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना (6 अगस्त 2026): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2295738
- MyScheme पर Market Development Assistance: https://www.myscheme.gov.in/schemes/mda-fert
- केंद्र सरकार की सभी 726 योजनाओं की सूची: /kendra-sarkar-ki-yojnayen/

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