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हरियाणा जियोस्टैक ऐप: एक क्लिक पर मिलेगी 1.70 करोड़ भूमि रिकॉर्ड की जानकारी

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: हरियाणा जियोस्टैक ऐप: एक क्लिक पर मिलेगी 1.70 करोड़ भूमि रिकॉर्ड की जानकारी
  • तारीख़: 3 नवम्बर 2026, 10:54 पूर्वाह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: विकास
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

हरियाणा में जमीन से जुड़ी जानकारी पाना अब पहले से कहीं आसान होने जा रहा है। हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र यानी हरसेक ने जियोस्टैक ईओडीबी नाम का डिजिटल मंच तैयार किया है, जिस पर प्रदेश के भूमि रिकॉर्ड और भौगोलिक जानकारी एक ही जगह उपलब्ध कराई गई है। इस मंच का मकसद यह है कि जमीन के मालिक और आम नागरिक को अपनी जमीन की पहचान, उसकी भौगोलिक स्थिति और उससे जुड़े उपलब्ध रिकॉर्ड के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। उपग्रह से मिले आंकड़ों, डिजिटल मानचित्रों और भौगोलिक सूचना प्रणाली यानी जीआईएस तकनीक के इस्तेमाल से यह जानकारी एक क्लिक पर देखने की व्यवस्था की गई है।

इस डिजिटल मंच की सबसे बड़ी खासियत इसका दायरा है। इसमें हरियाणा के सभी 23 जिलों, 143 तहसीलों और 7103 गांवों से जुड़ी जानकारी को एकीकृत किया गया है और इसके तहत 1.70 करोड़ से अधिक भूमि रिकॉर्ड शामिल किए गए हैं। यानी प्रदेश के किसी भी जिले की जमीन से जुड़ा उपलब्ध विवरण इसी एक मंच पर खोजा जा सकेगा। हरसेक के निदेशक डॉ. सुल्तान सिंह ने इस मंच को नागरिक केंद्रित डिजिटल मंच बताया है, जिसका मतलब है कि इसे आम नागरिक की सुविधा को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, ताकि तकनीकी जानकारी न रखने वाला व्यक्ति भी इसका इस्तेमाल कर सके।

जियोस्टैक ऐप पर जमीन की जानकारी खोजने के लिए खसरा नंबर और भूमि के भूखंड यानी पार्सल की पहचान का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके अलावा इसमें इंटरैक्टिव जीआईएस मानचित्र की सुविधा भी दी गई है, जिसमें नक्शे पर जमीन की स्थिति और उसकी भौगोलिक पहचान देखी जा सकेगी। ऐप में जीआईएस आधारित मापन का टूल भी मौजूद है, जिसके जरिए किसी जमीन का क्षेत्रफल मापा जा सकेगा और दो स्थानों के बीच की दूरी भी जानी जा सकेगी। ये सुविधाएं किसानों के साथ-साथ उन लोगों के लिए भी उपयोगी हैं, जो जमीन खरीदने, उद्योग लगाने या किसी विकास परियोजना की योजना बनाने से पहले उस जगह की स्थिति और उपलब्ध रिकॉर्ड का आकलन करना चाहते हैं।

इस पहल से किसानों को सबसे सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें अपनी जमीन के रिकॉर्ड के लिए बार-बार पटवारखाने या राजस्व दफ्तर जाने की जरूरत कम होगी। आम नागरिक किसी संपत्ति की भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध रिकॉर्ड घर बैठे देख सकेंगे, जिससे जमीन से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता बढ़ेगी। उद्यमियों को भी किसी स्थान पर उद्योग या व्यावसायिक गतिविधि शुरू करने से पहले जमीन की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर यह मंच हरियाणा में डिजिटल शासन की दिशा में एक अहम कदम है, जिसमें उपग्रह तकनीक और डिजिटल मानचित्रों को आम नागरिक की रोजमर्रा की जरूरत से जोड़ा गया है। जमीन से जुड़े प्रमाणित दस्तावेजों के लिए नागरिकों को संबंधित आधिकारिक प्रक्रिया का पालन करना होगा, लेकिन शुरुआती जानकारी और पहचान के लिए यह मंच एक भरोसेमंद शुरुआत साबित हो सकता है।


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