सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर मोदी-शाह का नमन, पंचकूला में सैनी ने दिखाई रन फॉर यूनिटी को हरी झंडी
देशभर में 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लौह पुरुष को श्रद्धांजलि दी और देश की एकता के उनके योगदान को याद किया। हरियाणा में भी इस दिन का विशेष उत्साह देखने को मिला, जहाँ पंचकूला में रन फॉर यूनिटी का आयोजन हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में सरदार पटेल को अखंड भारत के प्रणेता और देश के लौह पुरुष के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि पटेल ने एक सशक्त, समृद्ध और समर्थ भारत के निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। माँ भारती की सेवा में उनका त्याग और समर्पण विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए आज भी बड़ा प्रेरणास्रोत है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पटेल को आधुनिक भारत के शिल्पकार और राष्ट्रीय एकता व अखंडता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सरदार साहब ने अपने साहस और दूरदर्शिता से रियासतों में बँटे देश को एक सूत्र में पिरोकर मजबूत भारत की नींव रखी। अखिल भारतीय सेवाओं की आधारशिला रखकर उन्होंने देश की प्रशासनिक व्यवस्था को भी सुदृढ़ आधार दिया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंचकूला में रन फॉर यूनिटी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह दौड़ एमडीसी स्थित शिवालिक कंट्री क्लब से शुरू होकर माता मनसा देवी मंदिर के वीआईपी गेट तक गई। इस दौरान बड़ी संख्या में युवा, खिलाड़ी और आम नागरिक तिरंगा लेकर दौड़े और एकता का संदेश दिया। चंडीगढ़ और पंचकूला में इस आयोजन और वीवीआईपी आवागमन को देखते हुए यातायात व्यवस्था के लिए विशेष एडवाइजरी भी जारी की गई थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर गुजरात के एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने वहाँ 426.71 करोड़ रुपये की 31 पर्यटन और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इसके बाद उन्होंने रेन फॉरेस्ट और वामन वृक्ष वाटिका का दौरा किया और शाम को राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में भाग लिया, जिसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्य पुलिस बलों की एकता परेड हुई।
सरदार पटेल देश के पहले गृह मंत्री और पहले उप प्रधानमंत्री थे। आजादी के बाद 550 से अधिक रियासतों को भारतीय संघ में मिलाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक मानी जाती है। हर वर्ष 31 अक्टूबर को उनकी जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है, ताकि नागरिकों को यह याद रहे कि राष्ट्र की ताकत उसकी एकता में ही निहित है।
