हरियाणा एनसीआर में वायु प्रदूषण पर नजर: पवन कमांड सेंटर शुरू 5 से 20 नवंबर तक निर्माण कार्य बंद
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों से पहले वायु प्रदूषण से निपटने की तैयारी को एक नई तकनीकी ताकत मिली है। केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार 30 अक्टूबर को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के नए एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र पवन-आई3सी की समीक्षा की। यह केंद्र नई दिल्ली में आयोग के मुख्यालय में स्थापित किया गया है और इसका मकसद पूरे एनसीआर में प्रदूषण की निगरानी और उस पर कार्रवाई को एक ही स्क्रीन से जोड़ना है।
पवन का पूरा नाम प्लेटफॉर्म फॉर एयर क्वालिटी विजिलेंस एंड एनालिटिक्स फॉर एनसीआर है। इसमें 30 से अधिक डेटा स्रोतों को एक मंच पर जोड़ा गया है। वायु गुणवत्ता, उत्सर्जन, मौसम, उपग्रह से मिली जानकारी, कैमरा फीड, यातायात, जनता की शिकायतें और विभिन्न एजेंसियों के अनुपालन रिकॉर्ड अब एक साथ देखे जा सकेंगे। दिल्ली-एनसीआर के 111 सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों, 2300 से अधिक उद्योगों, 3200 से अधिक सक्रिय निर्माण स्थलों और यातायात जाम वाले प्रमुख स्थानों की जानकारी भी इसी प्रणाली से जुड़ी है।
इस केंद्र के काम करने का सिद्धांत पहचान विश्लेषण और कार्रवाई है। किसी खेत में पराली जलने की घटना हो, किसी उद्योग की चिमनी से प्रदूषण फैल रहा हो या किसी निर्माण स्थल पर धूल उड़ रही हो, तो उसे तुरंत देखा जाएगा, चिह्नित किया जाएगा और संबंधित एजेंसी को कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा। मंत्री ने कहा कि स्वच्छ हवा किसी एक एजेंसी या किसी एक राज्य के अकेले प्रयास से नहीं मिल सकती, इसलिए हर वह डेटा जो मायने रखता है, अब एक स्क्रीन पर होगा ताकि नियम तोड़ने वाले उद्योगों, प्रदूषण स्रोतों और ट्रैफिक हॉटस्पॉट पर तेजी से कार्रवाई हो सके।
समीक्षा के दौरान मंत्री ने एक बड़ा फैसला भी सुनाया। एनसीआर में धूल फैलाने वाले निर्माण और विध्वंस कार्य 5 नवंबर से 20 नवंबर तक रोके जाएंगे। यह वह समय है जब क्षेत्र में वायु गुणवत्ता आमतौर पर सबसे ज्यादा खराब होती है। राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को इस रोक से छूट दी जाएगी और आयोग इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी करेगा। हरियाणा के एनसीआर जिलों गुरुग्राम फरीदाबाद और सोनीपत में भी इस रोक का असर पड़ेगा, और अधिक वाहन घनत्व वाले जिलों के लिए वर्क फ्रॉम होम के निर्देश भी अपेक्षित हैं।
मंत्री ने पंजाब और हरियाणा के किसानों के पराली प्रबंधन की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि करीब आधी कटाई पूरी हो चुकी है और क्षेत्र पराली के कम से कम 40 प्रतिशत हिस्से को जलाने के बजाय अन्य उपयोगों में लगाने के लक्ष्य के करीब पहुंच रहा है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय मिल रही है और चक्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। हरियाणा के एनसीआर जिलों के लिए वास्तविक समय की निगरानी, नवंबर में निर्माण रोक और पराली प्रबंधन का यह संयोजन सर्दियों में वायु गुणवत्ता की लड़ाई को पहले से ज्यादा व्यवस्थित और डेटा आधारित बनाता है।
