हरियाणा पुलिस ई-समन से 6 महीने में ₹25.65 करोड़ की बचत, 27 लाख लीटर ईंधन और 3240 रिम कागज बचे
हरियाणा पुलिस की डिजिटल व्यवस्था ने सरकारी खजाने और पर्यावरण दोनों को बड़ी राहत दी है। इलेक्ट्रॉनिक समन (ई-समन) प्रणाली से पिछले छह महीनों में करीब 25.65 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत हुई है। इस दौरान 27 लाख लीटर से अधिक ईंधन बचा और 3240 रिम कागज की खपत भी टल गई। यह जानकारी हरियाणा पुलिस की ओर से जारी बयान में दी गई है, जिसमें एक स्वतंत्र अध्ययन के हवाले से डिजिटल प्रक्रिया का असर बताया गया है।
ई-समन व्यवस्था नए आपराधिक कानूनों के तहत शुरू की गई डिजिटल प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके तहत अब समन कागज पर भेजने के बजाय इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पहुँचाए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार राज्य में अब करीब 78.13 प्रतिशत समन इलेक्ट्रॉनिक तरीके से प्राप्त हो रहे हैं। इससे पुलिसकर्मियों को समन पहुँचाने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती, जिससे ईंधन, समय और कागज तीनों की बचत हो रही है।
डिजिटल सुधार का लाभ सिर्फ समन तक सीमित नहीं है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालतों में सुनवाई से भी बड़ी बचत हुई है। सात महीनों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से करीब 1,22,400 लीटर ईंधन बचा, जिसकी कीमत लगभग 1.16 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिसकर्मियों के दूर से अदालत में पेश होने से यात्रा भत्ते में भी करीब 1.10 करोड़ रुपये की बचत दर्ज की गई है।
ई-चालान व्यवस्था ने भी पर्यावरण को फायदा पहुँचाया है। चार महीनों में ई-चालान से 6704 रिम कागज बचे, जिससे 8165 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम हुआ और 3.15 लाख लीटर से अधिक पानी की बचत हुई। खोज और जब्ती की कार्रवाई अब पूरी तरह डिजिटल तरीके से दर्ज हो रही है, जबकि गवाहों के बयान भी ई-साक्ष्य जैसे प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन दर्ज किए जा रहे हैं।
हरियाणा पुलिस का यह डिजिटल मॉडल अब दूसरे राज्यों के लिए भी मिसाल बन रहा है। कागज रहित, तेज और पारदर्शी व्यवस्था से न सिर्फ सरकारी खर्च घटा है, बल्कि आम लोगों को भी तेज न्याय मिलने की राह आसान हुई है। डिजिटल इंडिया की दिशा में यह कदम हरियाणा को तकनीक आधारित पुलिसिंग में अग्रणी राज्यों की पंक्ति में खड़ा करता है।
